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E-20 पेट्रोल विवाद में नया मोड़, ब्लेंडिंग या मिलावटी ईंधन... क्या है असल समस्या? Inside Report

Published: Fri, 17 Jul 2026 09:00 PM (IST)

रायपुर उपभोक्ता आयोग ने मारुति सुजुकी को ई-20 अनुकूल न होने वाली कार देने पर मुआवजा देने का आदेश दिया है, जिससे ई-20 ईंधन विवाद को नया मोड़ मिला है।

20 फीसद एथनॉल मिश्रित पेट्रोल विवाद में नया मोड़ (प्रतीकात्मक फोटो)

20 फीसद एथनॉल मिश्रित पेट्रोल विवाद में नया मोड़ (प्रतीकात्मक फोटो)

HighLights

  1. रायपुर आयोग ने मारुति सुजुकी को ई-20 कार पर मुआवजा देने को कहा।

  2. ऑटो कंपनियां मिलावटी ईंधन से इंजन क्षति की शिकायतें स्वीकारती हैं।

  3. गडकरी के मुफ्त पार्ट बदलने के दावे को कंपनियों ने नकारा।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। रायपुर जिला उपभोक्ता आयोग के हालिया फैसले ने ई-20 (20 फीसद एथनॉल मिश्रित पेट्रोल) को लेकर चल रहे विवाद को नया आयाम दे दिया है।

आयोग ने एक शिकायतकर्ता को ई-20 अनुकूल न होने वाली कार देने के मामले में मारुति सुजुकी के खिलाफ फैसला सुनाते हए ग्राहक को मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह पहला मौका है जब किसी न्यायालय ने माना कि आटो कंपनियां ग्राहकों को ई-20 चालित वाहनों की पूरी जानकारी नहीं दे रही हैं।

मारुति सुजुकी ने इस फैसले पर कहा है कि मामला ईंधन में मिलावट का है। दैनिक जागरण ने इस बारे में विभिन्न कार कंपनियों से बात की है तो उन्होंने स्वीकार किया है कि पिछले कुछ महीनों में सर्विस सेंटर पर मिलावटी ईंधन से जुड़ी शिकायतें बढ़ी हैं।

हालांकि कंपनियां सामने आ कर कुछ नहीं बोल रही हैं लेकिन उनका कहना है कि ई20 पेट्रोल से माइलेज में जरूर थोड़ी कमी आ सकती है लेकिन ई10 से चल रहे वाहनों में भी इंजन की शिकायत नहीं है।

ईंधन की क्वालिटी खराब होने से पार्ट्स पर असर

एक प्रमुख कंपनी के अधिकारी ने कहा, 'हमें पता चल रहा है कि कई वाहनों में सल्फर और क्लोरीन की अधिकता पाई जा रही है, जिससे इंजन, फ्यूल लाइन और रबर कंपोनेंट्स खराब हो रहे हैं। यह ईंधन की गुणवत्ता खराब होने की वजह से हो सकता है।'

ऑटोमोबाइल कंपनियों के अधिकारी बताते हैं कि ई-20 में मिले एथनॉल भी रबर पार्ट्स को नुकसान पहुंचाते हैं जिसकी बात सरकार की तरफ से भी की गई है, लेकिन मिलावट इसे और बढ़ा देती है।

अधिकारी बताते हैं कि भारत में इस तरह से मोटे तौर पर 30 करोड़ दोपहिया वाहन और 7-8 करोड़ कारें हैं। इनमें सात करोड़ बीएस-6 मानक वाले वाहन (वर्ष 2023 से उत्पादन) हैं, जो ई-20 ईंधन के लिए ज्यादा उपयुक्त हैं। यानी तकरीबन 78 फीसद वाहन ऐसे हैं जिसे ई-20 के लिहाज से तैयार नहीं किया गया था।

बहरहाल पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने पिछले दिनों इस तर्क को खारिज किया था कि ई-10 के लिए निर्मित वाहनों में ई-20 का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

मंत्रालय ने कहा था कि, 'लोगों में एक चिंता वाहनों में ई-10 के लिए उपयुक्त मैनुअल को लेकर है। लोगों को समझना चाहिए कि वाहन मैनुअल उस समय के ईंधन स्टैंडर्ड को दर्शाता है, जब वह वाहन सर्टिफाइड हुआ था। इसका यह मतलब नहीं है कि अगर बाद में व्यापक वैज्ञानिक परीक्षण, इंजीनियरिंग वैलिडेशन और नियामक मंजूरी के बाद ईंधन स्टैंडर्ड में बदलाव होता है तो वाहन अचानक असुरक्षित हो जाता है।'

मंत्रालय ने बताया था, 'ई-10 से ई-20 की तरफ जाना अनुमानों के आधार पर नहीं किया गया था बल्कि वर्षों की परीक्षण, वाहन निर्माताओं के साथ 2021 से ही परामर्श और फील्ड अनुभव पर आधारित था।'

मंत्रालय के अनुसार वाहन निर्माता कंपनी भी पूरी तरह ई-20 से सहमत थे इसीलिए सभी गाड़ियों की वारंटी मिल रही है।

मुफ्त में बदले जाएंगे गाड़ी के पार्ट्स

हालांकि ई-20 ईंधन से वाहनों के रबर पार्ट्स को क्षति होने की बात हाल ही में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक साक्षात्कार में स्वीकार किया है।

नितिन गडकरी ने कहा है कि पुरानी कारों (ई-20 या उससे कम मिश्रण के लिए निर्मित) के उन पार्ट्स को सर्विसिंग के दौरान मुफ्त बदला जाएगा, जो ई-20 से प्रभावित हुए हैं।

गडकरी ने दावा किया था कि इस बारे में वाहन निर्माताओं को निर्देश दिया गया है कि वे इन पुर्जों को ग्राहक से बिना किसी अतिरिक्त लागत के बदल दें। लेकिन इस बारे में कम से कम दो प्रमुख आटो कंपनियों ने दैनिक जागरण को बताया कि उन्हें इस तरह का निर्देश नहीं मिला है।

भारत में लगभग 1,00,266 पेट्रोल पंप हैं (नवंबर 2025 के अंत तक के आंकड़ों के अनुसार)। लगभग सभी पेट्रोल पंपों पर अभी ई-20 ही मिल रहा है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अप्रैल 2026 से ई 20 को देशव्यापी स्टैंडर्ड बना दिया गया है। साथ ही शुद्ध पेट्रोल (ई-0) या ई-10 अलग से उपलब्ध कराना अब संभव नहीं है।

इसी बीच केंद्र सरकार ने इस साल के अंत तक देश में 500 ई-85 पेट्रोल पंप स्थापित करने की भी घोषणा की है। ई 85 पेट्रोल ई20 के मुकाबले थोड़ा सस्ता भी है। वैसे देश में सिर्फ मारुति सुजुकी ने ही अभी ई85 से चलने वाले एक वाहन को लॉन्च किया है।

उम्मीद है कि कुछ और कंपनियां जल्द ही अपने अन्य मॉडलों की लॉन्चिंग करेंगी। महंगे प्रीमियम पेट्रोल की बिक्री हर स्टेशन पर पूर्ववतत होती रहेगी।

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