नई दिल्ली (ब्यूरो)। सामान व सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली में ई-वे बिल की व्यवस्था एक फरवरी से लागू हो जाएगी। ट्रांसपोर्टरों को एक राज्य से दूसरे राज्य में सामान भेजने के लिए इलेक्ट्रॉनिक वेबिल या ई-वे बिल की जरूरत होगी।

ई-वे बिल की व्यवस्था से न सिर्फ जीएसटी की चोरी रुकेगी व राजस्व भी बढ़ेगा बल्कि यह पर्यावरण के लिए अनुकूल भी होगा। सरकार का अनुमान है कि ई-वे बिल से हर दिन लगभग 50 टन कागज की बचत होगी। इस तरह बड़ी संख्या में पेड़ कटने से बचेंगे।

दरअसल, हर दिन लगभग 40 लाख ई-वे बिल जेनरेट होंगे। चूंकि यह पूरा काम ऑनलाइन होगा इसलिए इसका प्रिंटआउट निकालने की आवश्यकता नहीं होगी। ई-वे बिल व्यवस्था को लागू करने के लिए राज्यों में आईटी नेटवर्क तैयार है। आईटी नेटवर्क की तैयारी पूरी न होने के कारण ही ई-वे बिल की व्यवस्था को जीएसटी लागू होने के दिन से नहीं अपनाया जा सका था।

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By Nancy Bajpai