नई दिल्‍ली, जेएनएन। धूल, धूल और सिर्फ धूल! पिछले कुछ समय से घर और बाहर धूल ही धूल नजर आ रही है। ये धूल भरी आंधी सिर्फ दिल्‍ली-एनसीआर में ही नहीं, बल्कि पूरा उत्‍तर भारत में लोगों के स्‍वास्‍थ्‍य पर दुष्‍प्रभाव डाल रही है। राजस्थान और ब्‍लूचिस्‍तान (पाकिस्तान) की ओर से चलीं धूलभरी गर्म हवाओं की वजह से उत्तर भारत के आसमान पर धूल की एक परत-सी बन गई है। धूल भरी हवा से राजस्थान, दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, चंडीगढ़ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश सर्वाधिक प्रभावित रहे। धूल भरी हवाएं चलने का कारण पश्चिमी विक्षोभ माना जा रहा है। हालांकि पर्यावरणविद इसके लिए आधुनिकीकरण और पेड़ों के तेजी से काटे जाने को भी जिम्‍मेदार ठकराते हैं। उधर डॉक्‍टर इस मौसम में घर से ना निकले और कुछ सावधानियां बरतने की सलाह दे रहे हैं।

पर्यावरणविद विमलेन्दु झा बताते हैं कि दिल्ली की हवा में धूल भरे कण मौजूद हैं। इस स्थिति के लिए दो प्रमुख कारक ज़िम्मेदार हैं।
पहला बाहरी कारण: राजस्थान की तरफ से आने वाली एंटी साइक्लोनिक विंड के वजह से धूल भरी आंधी दिल्‍ली-एनसीआर में आ रही है।
दूसरा अंदरूनी कारण: दिल्ली में हो रहे कंस्ट्रक्शन, लैंडफिल, बदरपुर प्लांट, वाहनों की बढ़ती संख्या धूल की पर नजर आने के प्रमुख कारण हैं। 

विमलेन्दु झा बताते हैं कि दिल्ली में पिछले तीन दिनों से स्थिति काफी ख़राब है। ज़्यादातर जगहों पर एयर इंडेक्स क्वालिटी 999 है। इस समय स्थिति काफी अलार्मिंग है। ये सामान्य स्थिति नहीं है। राज्य सरकार और केंद्र सरकार को इस स्थिति में फ़ौरन कुछ कदम उठाने ज़रूरी है। दिल्ली और एनसीआर में चल रहे सभी कंस्ट्रक्शन के काम के कारण समस्या पैदा हो रही है। लगातार बढ़ रही वाहनों की संख्या, पेड़ो की संख्या में कमी। दिल्ली के नज़दीक गुडगांव के आसपास के इलाकों में निर्माण की वजह से अरावली के जंगलों में बड़े पैमाने पर पेड़ों को काटा गया है। अरावली के जंगल दिल्ली के लिए शील्ड का काम करते थे।

ऐसे काबू में आएगी धूल भरी आंधी
दिल्ली में चल रहे सभी तरह के कंस्ट्रक्शन के काम पर फ़ौरन टेम्परेरी रोक लगाने की ज़रूरत है।
वाहनों की संख्या में कमी की जानी चाहिए। पब्लिक ट्रांसपोर्ट को प्रोत्साहन देने की ज़रूरत।
पेड़ों की कटाई पर रोक लगनी चाहिए। ज़्यादा से ज़्यादा वृक्षारोपण होना चाहिए। साथ ही सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनायीं गयी EPCA को कड़े कदम उठाने की ज़रूरत।

मौसम विभाग की सलाह
स्काईमेट वेदर के मुख्य मौसम विज्ञानी महेश पलावत का कहना है कि राजस्थान और बलूचिस्तान की ओर से चल रही गर्म हवाओं के साथ धूल करीब 40 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार से दिल्ली की ओर आ रही है। चूंकि मौसम में नमी नहीं है, इस कारण धूल की इस चादर का असर कई दिन तक बना रहेगा। दिल्ली में कई गुना बढ़ा प्रदूषण का स्तर धूल भरी हवाओं ने दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्थिति में पहुंचा दिया है। पर्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 बुधवार को दिल्ली में तीन गुना से भी अधिक 200 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया, जबकि इसका सामान्य स्तर 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर होता है। इसी तरह पीएम 10 का सामान्य स्तर 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर होता है, जबकि बुधवार को यह 981 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रिकॉर्ड किया गया। मौसम विशेषज्ञों ने ऐसे हालात में बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को घर के भीतर ही रहने की सलाह दी है। घर व दफ्तर की खिड़कियां-दरवाजे बंद रखने को कहा है। साथ ही कचरा न जलाने की सलाह दी है। इस दौरान निर्माण कार्य भी बंद रखने की भी बात कही है।

डॉक्टर की सलाह
दैनिक जागरण से बातचीत के दौरान पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुख़र्जी के कार्यकाल के दौरान उनके फिज़िशियन रहे सर गंगा राम हॉस्पिटल के सीनियर कंसलटेंट डॉक्‍टर एम वली ने बताया कि दिल्ली में धूल भरा मौसम दमा, किडनी, ब्लड प्रेशर और मधुमेह के मरीज़ो के लिए परेशानी पैदा कर रहा है। अस्पतालों में आने वाले मरीज़ों में बच्चो और वृद्धों की संख्या बढ़ रही है। धूल के कण हवा के रास्ते सांस की नली में पहुंच रहे हैं, जिससे गला चोक हो रहा है। इससे सांस लेने में परेशानी हो सकती है। इस समय प्रेग्नेंट महिलाओ और किडनी के मरीज़ों को खासी सावधानी बरतने की ज़रूरत है।

धूल भरी 'जहरीली' आंधी के दुष्‍प्रभाव
बच्‍चों-बुजुर्गों के लिए बेहद घातक: मौसम के ये बिगड़े तेवर और धूल भरी आंधी लोगों के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बेहद घातक सिद्ध हो सकती है। इन दिनों उत्‍तर भारत और खासतौर पर दिल्‍ली-एनसीआर में जो आंधी चल रही है, उसमें पीएम 2.5 की मात्रा 6 से 7 गुना ज्यादा बढ़ गई है। ऐसी स्थिति में फेफड़ों को भारी नुकसान पहुंच सकता है। धूल भरा ये मौसम मासूम बच्चों और बुजुर्गों के लिए सबसे अधिक खतरनाक है। बच्चों और बुजुर्गों का इम्यून सिस्टम मजबूत नहीं होता, जिसके चलते दोनों ही जहरीली हवा और मौसमी बीमारियों की चपेट में जल्दी आ जाते हैं।

दमा और दिल के मरीज रहें बचकर: दमा के मरीजों को इस धूल भरे मौसम में खास ध्‍यान रखने की जरूरत है। दमा वालों के लिए ये मौसम जानलेवा हो सकता है। दिल के मरीजों की दिक्कतें भी ऐसे दूषित हवा के चलते बढ़ जाती है। अगर किसी को धूल से एलर्जी है, तो वे भूलकर कर भी उस समय घर से बाहर ना निकलें जब धूल भरी आंधी चल रही हो। आम लोगों को भी धूल भरी आंधी में निकलने से बचना चाहिए, क्‍योंकि इससे त्‍वचा, आंखें, गला, नाक और कान प्रभावित हो सकते हैं।

प्रेग्‍नेंट महिलाएं रखें खास ध्‍यान: प्रेग्‍नेंट महिलाओं को भी इस मौसम में अपना खास ध्‍यान रखना चाहिए। अगर प्रेग्‍नेंट महिलाएं धूल भरी आंधी की चपेट में आती हैं, तो उनके साथ-साथ बच्‍चे के स्‍वास्‍थ्‍य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इस जहरीली हवा में सांस लेना अजन्में बच्चे के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है।

कैसे बचें धूल भरी इस आंधी से...?
डॉक्‍टर एम वली बताते हैं कि अगर आप धूल भरी आंधी में घर से बाहर निकलते हैं, तो सबसे पहले आपकी आंखें इसकी चपेट में आती हैं। धूल के कण आंखों में जाते ही इनमें इरिटेशन और रेडनेस पैदा कर देते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टरी सलाह लें और ठंडे पानी से लगातार धोते रहें। आंखों को तब तक धोते रहें, जब तक आराम नहीं मिल जाता है। ऐसे मौसम में जहां तक संभव हो घर से बाहर कम ही निकलें। बाहर निकले की स्थिति में अपने सिर, नाक और आँखों को अच्छी तरह से ढकें। घर के आसपास पानी का छिड़काव करते रहें, जिससे धूल मिट्टी का उड़ना कम हो। घर से बहार निकलते समय एन-5 मास्क ही पहनें। गरिष्‍ठ भोजन से बचें और मौसमी सब्जियों और फलों का सेवन करें। सबसे जरूरी पानी पीते रहें, ताकि शरीर में पानी की कमी ना हो पाए। नींबू का सेवन करें। नीबू में विटामिन सी होता है। जो की एंटी ऑक्सीडेंट होता है। अपने शरीर को अच्छी तरह से पानी से धोएं। साबुन का सेवन कर सकते हैं। फेस वाश का इस्तेमाल न करें।

मंगल पर भी धूल भरी आंधी
धूल का प्रकोप उत्‍तर भारत में ही नहीं मंगल ग्रह पर भी देखने को मिल रहा है। मंगल ग्रह पर भीषण धूल भरी आंधी चलने से नासा का ऑपरचुनिटी रोवर शिथिल पड़ गया है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा है कि इस कारण से सौर-ऊर्जा से चलने वाला यह मानवरहित यान सुसुप्त अवस्था में चला गया है और इसके अस्तित्व को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। नासा ने बताया कि अकस्मात धूल भरी तीव्र आंधी चलने से लाल ग्रह पर सूर्य की किरणों का मार्ग अवरुद्ध हो गया है और करीब 1.4 करोड़ वर्ग मील (3.5 करोड़ वर्ग किलोमीटर) में फैले इलाके में धूल के गुबार की परत-सी बिछ गई है। नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी में ऑपरचुनिटी के परियोजना प्रबंधक जॉन कालास ने बताया कि ऑपरचुनिटी को मंगल ग्रह पर परसीवरेंस वैली नामक स्थान पर देखा गया है। बता दें कि मंगल पर जीवन का पता लगाने के लिए ऑपरचुनिटी और स्पिरिट नामक दो रोबोटिक यानों को वर्ष 2003 में प्रक्षेपित किया गया था।

Posted By: Tilak Raj