नई दिल्ली, एएनआइ । अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत एक और बड़ी छलांग लगाने की तैयारी में है। इसरो चीफ (ISRO chairperson) डॉ. के सिवन (Dr K. Sivan) ने बुधवार को प्रेस कांफ्रेंस कर बताया कि भारत का मिशन चंद्रयान-2 (Chandrayaan 2) 15 जुलाई को दोपहर 2.51 बजे चांद के लिए टेक ऑफ करेगा। चंद्रयान-2 अपने साथ लगभग 3.8 टन वजनी 13 उपग्रहों को भी अपने साथ ले जाएगा। यह वजन लगभग आठ हाथियों के बराबर है।

इस बीच चंद्रयान-2 मिशन को लेकर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व प्रमुख जी माधवन नायर ने बड़ा खुलासा किया है। इसरो के पूर्व प्रमुख जी माधवन नायर ने खुलासा दावा किया है कि चंद्रयान-2 मिशन पहले ही लांच हो गया होता लेकिन तत्कालीन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार ने 2014 के लोकसभा चुनावों को देखते हुये राजनीतिक कारणों’से चंद्रयान परियोजना को आगे बढ़ा दिया।

भारत के चंद्रयान-1 मिशन के चीफ रहे नायर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख भी रहे और अंतरिक्ष विभाग में 2003 से 2009 तक सचिव के पद पर भी रहे। उनके कार्यकाल के दौरान चंद्रयान-1 22 अक्टूबर 2008 को लांच किया गया था। उन्होंने कहा कि चंद्रयान-2 को 2012 के अंत में रवाना किया जाना था। बता दें जी माधवन नायर नायर बीते साल अक्ट्रबर में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गये थे।

जी माधवन नायर के खुलासे के बाद कांग्रेस ने चंद्रयान-2 मिशन में यूपीए सरकार की देरी पर प्रतिक्रिया दी है। पार्टी प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने नायर के बयान के बारे में पूछे जाने पर 'मैंने यह बयान नहीं देखा है, लेकिन ऐसा है तो मैं इसकी निंदा करता हूं। इसकी कड़े शब्दों में निंदा करता हूं।'

उन्होंने कहा, 'आपका काम सरकार की आलोचना करना नहीं है। आप वैज्ञानिक हैं, आपका स्थान तो गौरवान्वित करने वाला है। आप देखते हैं कि एक पार्टी सत्ता से बाहर है तो कुछ बोलने लगते हैं। कल को कांग्रेस सत्ता में आई तो इसकी धुन गाने लगेंगे।'

2030 तक भारत का खुद का स्पेस स्टेशन होगा
बता दें, ISRO चीफ K Sivan ने गुरवार को बताया है की भारत अपना स्पेस स्टेशन लॉन्च करने की योजना बना रहा है। यह महत्वकांशी प्रोजेक्ट गगनयान मिशन का एक्सटेंशन होगा। Sivan ने बताया- ह्यूमन स्पेस मिशन के लॉन्च के बाद हमें गगनयान प्रोग्राम को बनाए रखना है। इस परिप्रेक्ष्य में, भारत खुद के स्पेस स्टेशन की प्लानिंग कर रहा है ।

इसरो प्रमुख के. सिवान ने गुरूवार को इसकी जानकारी दी और बताया कि इस स्टेशन को फिलहाल 2030 तक स्थापित करने की योजना है। यह करीब 20 टन का होगा। जिसमें चार से पांच अंतरिक्ष यात्री एक साथ 15 से 20 दिनों तक रह सकेंगे। यह स्टेशन इसलिए भी अहम है, क्योंकि माइक्रोग्रेविटी से जुड़े प्रयोग सिर्फ यहीं हो सकते है। जो गगनयान मिशन की कामयाबी को आगे बढ़ाने के लिए बेहद जरूरी होगा।

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Posted By: Shashankp

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