लखनऊ [जाब्यू]। उत्तर प्रदेश की सियासत में तूफान खड़ा कर देने वाले प्रतापगढ़ के बलीपुर हत्याकांड के एक मामले में सीबीआइ ने शुक्रवार को आरोप पत्र दाखिल किया। बलीपुर के ग्राम प्रधान नन्हे यादव की हत्या में पांच लोगों के खिलाफ दाखिल तीस पन्ने के इस आरोप पत्र में कहीं भी पूर्व मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया का जिक्र नहीं है। सीबीआइ गवाहों की सुरक्षा को लेकर जरूर सतर्क है और अदालत से इस बात के लिए अनुरोध किया है कि उनकी पहचान छुपाई जाए।

नन्हे यादव के परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों के आधार पर राजा भैया सवालों के घेरे में थे। शुरुआती दौर में सीबीआइ ने उनसे कोई पूछताछ भी नहीं की। पर अभी हाल में दो दिनों तक लगातार उनसे लंबी पूछताछ चली। सूत्रों का कहना है कि सीबीआइ को न तो राजा भैया के खिलाफ कोई साक्ष्य मिला और न ही पूछताछ में कोई ऐसा तथ्य निकला, जिससे उनकी घेरेबंदी हो। यह अलग बात है कि नन्हे की हत्या के आरोप में राजा भैया के करीबी संजय प्रताप सिंह और राजीव प्रताप सिंह पर सीबीआइ का शिकंजा कस गया है। सीबीआइ ने साक्ष्यों के आधार पर हत्या के षड्यंत्र में इनकी भूमिका मानी।

उल्लेखनीय है कि बीती दो मार्च को प्रतापगढ़ के बलीपुर में प्रधान नन्हे यादव की हत्या कर दी गई थी। इसके बाद मौके पर पहुंचे डीएसपी कुंडा जियाउल हक को भी मार डाला गया। इस दौरान बंदूक की गोली चलने से नन्हे के भाई सुरेश यादव की भी मौत हो गई। इस घटना में अखिलेश सरकार के खाद्य एवं रसद मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया पर आरोप लगे और डीएसपी की पत्नी परवीन ने उनके खिलाफ हत्या के षड्यंत्र का मुकदमा दर्ज कराया। इसी के चलते राजा भैया को अपना पद छोड़ना पड़ा।

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