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स्वदेशी तकनीकों से रडार और इलेक्ट्रानिक वॉरफेयर सिस्टम को मिली अभूतपूर्व शक्ति, खत्म हुई विदेशी आयात पर निर्भरता

Published: Sun, 13 Sep 2026 09:03 PM (IST)

रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, डीआरडीओ ने हाई-फ्रीक्वेंसी रक्षा प्रणालियों के लिए स्वदेशी गैलियम नाइट्राइड सेमीकंडक्टर तकनीक का सफल ...और पढ़ें

डीआरडीओ की ऐतिहासिक उपलब्धि (फाइल फोटो)

डीआरडीओ की ऐतिहासिक उपलब्धि (फाइल फोटो)

HighLights

  1. डीआरडीओ ने स्वदेशी गैलियम नाइट्राइड तकनीक का सफल प्रदर्शन किया

  2. यह तकनीक रडार और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम को मजबूत करेगी

  3. भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और निर्यात की ओर अग्रसर

एएनआई, नई दिल्ली। रक्षा मंत्रालय की वित्त वर्ष 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट में देश की रक्षा क्षमताओं को लेकर एक अत्यंत गर्व की अनुभूति कराने वाली बात सामने आई है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने हाई-फ्रीक्वेंसी वाले रक्षा प्रणालियों के लिए स्वदेशी उन्नत तकनीक का सफलतापूर्वक प्रदर्शन और कार्यान्वयन कर लिया है।

यह तकनीक अगली पीढ़ी के रडार, इलेक्ट्रानिक वारफेयर सिस्टम, अत्याधुनिक संचार, खुफिया निगरानी, टोही और मानवरहित प्रणालियों की रीढ़ साबित होगी। इस अभूतपूर्व उपलब्धि से भारतीय रक्षा क्षेत्र में एक नया सवेरा हुआ है, जो देश को वैश्विक मंच पर रक्षा तकनीक का सिरमौर बना रहा है।

इस तकनीकी सफलता का मुख्य आधार गैलियम नाइट्राइड सेमीकंडक्टर तकनीक है। डीआरडीओ की सालिड स्टेट फिजिक्स लैबोरेटरी ने चार-इंच व्यास के सिलिकान कार्बाइड वेफर्स को विकसित करने की स्वदेशी प्रक्रिया को मूर्त रूप दिया है।

इस सफलता के तहत मात्र 3.5 x 3 मिमी आकार की एक अकेली स्वदेशी गैलियम नाइट्राइड चिप 30 वाट तक की शक्ति प्रदान करने और सिलिकान से 300 गुना अधिक गति से काम करने में सक्षम है। एक्स-बैंड आवृत्तियों तक के लिए गैलियम नाइट्राइड मोनोलिथिक माइक्रोवेव इंटीग्रेटेड सर्किट तकनीक का सफल प्रदर्शन और कार्यान्वयन किया जा चुका है।

इसके अलावा, हैदराबाद स्थित गाएटेक में गैलियम नाइट्राइड-आन-सिलिकान कार्बाइड आधारित मोनोलिथिक माइक्रोवेव इंटीग्रेटेड सर्किट की सीमित उत्पादन सुविधा भी स्थापित की जा चुकी है, जो अंतरिक्ष, एयरोस्पेस, 5जी और उपग्रह संचार जैसे क्षेत्रों में देश की आत्मनिर्भरता को मजबूत कर रही है।

अतीत में गैलियम नाइट्राइड जैसी संवेदनशील, अत्याधुनिक और वैश्विक स्तर पर प्रतिबंधित तकनीक के लिए भारत पूरी तरह दूसरे देशों से आयात पर निर्भर था। इस रणनीतिक कमजोरी को दूर करने के लिए 'इनोवेशन्स फार डिफेंस एक्सीलेंस' पहल के तहत 'अग्निट सेमीकंडक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड' के साथ एक ऐतिहासिक अनुबंध किया गया था।

दिसंबर 2023 में हस्ताक्षरित इस समझौते का उद्देश्य देश के भीतर ही उन्नत गैलियम नाइट्राइड सेमीकंडक्टरों का डिजाइन, विकास और विनिर्माण करना था। रक्षा मंत्रालय ने इस वाणिज्यिक रूप से व्यावहारिक गैलियम नाइट्राइड और सिलिकान कार्बाइड आधारित तकनीक के विकास को सेमीकंडक्टर आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर करार दिया है।

यह स्वदेशी तकनीकी छलांग न केवल भारत की घरेलू डिजाइन क्षमताओं को मजबूत करती है, बल्कि भविष्य के युद्ध तंत्र के लिए रक्षा उपकरणों के आकार और वजन को कम कर उनकी कार्यक्षमता को भी भारी रूप से बढ़ाती है। आने वाले समय में यह उपलब्धि भारत को रक्षा क्षेत्र में एक बड़े निर्यातक के रूप में स्थापित करने की अपार संभावनाएं भी प्रदान कर रही