नई दिल्ली (जेएनएन)। देश के महान वैज्ञानिक और अंतरिक्ष कार्यक्रमों के जनक कहे जाने वाले डॉ विक्रम साराभाई की आज पुण्यतिथि है। डॉ विक्रम साराभाई का कहना था कि यदि हम राष्ट्र के निर्माण में अर्थपूर्ण योगदान देते हैं तो एडवांस तकनीक का विकास कर हम समाज की परेशानियों का समाधान भी निकाल सकते हैं।
उनका पूरा नाम डॉ विक्रम अंबालाल साराभाई था जिनका जन्म 12 अगस्त 1919 को गुजरात के अहमदाबाद में हुआ था। तकनीकी समाधानों के अलावा इनका और इनके परिवार का आजादी की लड़ाई में भी भरपूर योगदान रहा। इन्होंने कैंब्रिज विश्वविद्यालय से अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद अहमदाबाद में ही फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी की स्थापना की। इस समय उनकी उम्र महज 28 साल की थी। फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी की सफल स्थापना के बाद (पीआरएल) डॉ साराभाई ने कई संस्थानों की स्थापना में अपना महत्वपूर्ण सहयोग दिया।

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डॉ विक्रम साराभाई, परमाणु उर्जा आयोग के चेयरमैन भी रहे साथ ही उन्होंने अहमदाबाद क अन्य उधोगपतियों की मदद से आईआईएम अहमदाबाद की भी स्थापना की। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। सेटेलाईट इंस्ट्रक्शनल टेलीवीजन एक्सपेरिमेंट (साईट) के के लांच में भी डॉ साराभाई की अहम भूमिका रही जब इन्होंने 1966 में नासा से इसेक लिए बातचीत की। देश के पहले सेटेलाईट आर्यभट्ट को भी लांच करने में इनकी अहम भूमिका रही। डॉविक्रम साराभाई को 1962 में शांति स्वरुप भटनागर पुरस्कार और 1966 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। 1971 में महज 52 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। उनके मरणोपरांत 1972 में डॉ साराभाई को पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।

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Posted By: Srishti Verma

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