गुजरात यूनिवर्सिटी की पूर्व वीसी डॉ. नीरजा गुप्ता ने लौटाए 14 करोड़, अपनी ही 1000 किताबें जबरन बेचने का भी आरोप
मामला सामने आने के बाद उन्होंने परियोजना निरीक्षक के पद से इस्तीफा दिया और डिमांड ड्राफ्ट के जरिए 14 करोड़ ...और पढ़ें

गुजरात यूनिवर्सिटी की पूर्व वीसी डॉ. नीरजा गुप्ता ने लौटाए 14 करोड़
HighLights
डॉ. नीरजा ने गबन पकड़े जाने पर गुजरात विश्वविद्यालय को लौटाए 14 करोड़ रुपये
खुद की लिखी पुस्तक की एक हजार प्रतियां विश्वविद्यालय में बेचने का आरोप
डॉ. नीरजा की विदेश यात्रा में सौंदर्य प्रसाधनों पर खर्च किए सरकारी धन की भी जांच
शत्रुघ्न शर्मा, अहमदाबाद। गुजरात विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति डॉ. नीरजा गुप्ता पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बीच अपनी लिखी पुस्तक की एक हजार प्रतियां विश्वविद्यालय को बेचने का मामला सामने आया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन आरोपों की जांच गुजरात हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश दीपक व्यास को सौंपी है।
डॉ. गुप्ता वर्ष 2023 से 2026 तक विश्वविद्यालय की कुलपति रहीं। आरोप है कि प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम के तहत मिले 16.50 करोड़ रुपये में से 14 करोड़ रुपये उन्होंने अपने खाते में जमा कर लिए थे।
मामला सामने आने के बाद उन्होंने परियोजना निरीक्षक के पद से इस्तीफा दिया और डिमांड ड्राफ्ट के जरिए 14 करोड़ रुपये विश्वविद्यालय को लौटा दिए। शेष 2.50 करोड़ रुपये का ऑडिट किया जा रहा है।
उन पर कार्यकारी परिषद और सिंडिकेट को विश्वास में लिए बिना 32 करोड़ रुपये के कार्य निजी कंपनी जेपी स्ट्रक्चर को सौंपने का आरोप भी है।
पुस्तक बिक्री का मामला उनके कार्यकाल के अंतिम दिनों का है। आरोप है कि 18 जून, 2026 को उन्होंने अपनी पुस्तक ‘समग्र भारतीय अनुसंधान पद्धति’ की एक हजार प्रतियां विश्वविद्यालय को बिकवाईं।
इसके लिए प्रभात प्रकाशन को सवा चार लाख रुपये का भुगतान किया गया। बताया गया है कि विश्वविद्यालय की प्राध्यापक सोनल मल्होत्रा ने आठ विद्यार्थियों के लिए इन पुस्तकों का ऑर्डर दिया था।
सोनल की नियुक्ति भी डॉ. नीरजा गुप्ता ने ही की थी। पूर्व कुलपति पर अपने लिए अतिरिक्त पद सृजित कर विश्वविद्यालय कोष से प्रतिमाह सवा चार लाख रुपये लेने, महंगे पैकेज पर प्राध्यापकों की नियुक्ति करने और सरकारी खर्च पर विदेश यात्रा के दौरान सौंदर्य प्रसाधन खरीदने के आरोप भी हैं।
इनमें आईलाइनर, ब्रश और लिपस्टिक जैसी वस्तुएं शामिल बताई गई हैं। कार्यवाहक कुलपति जगदीश जोशी के अनुसार, सेवानिवृत्त न्यायाधीश इन सभी आरोपों और वित्तीय लेनदेन की जांच कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई तय होगी।
