जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। पड़ोसी देश पाकिस्तान की कथनी व करनी में एक बार फिर बड़ा फर्क सामने दिखाई दिया है। एक तरफ भारत के साथ शांति वार्ता शुरु करने की बात करने वाले पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह मेहमूद कुरैशी ने कश्मीर के अलगाववादी हुर्रियत नेता मीरवाइज उमर फारुख को फोन किया और उन्हें बताया कि किस तरह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे को उठाने की कोशिश कर रहा है। भारत ने इसका सख्त विरोध किया है और कहा है कि इससे पाकिस्तान के दोहरे चरित्र का पता चलता है, लेकिन पाकिस्तान से जो सूचनाएं मिली हैं उससे यह बात भी सामने आ रही है कि विदेश मंत्री कुरैशी पाकिस्तान सेना के सामने अपने आपको पीएम इमरान खान से ज्यादा करीबी साबित करने की कोशिश में यह फोन किया है।

इमरान करें दोस्ती की बात, कुरैशी ने किया अलगाववादी को फोन

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस टेलीफोन वार्ता के बारे में एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है कि जिसमें कहा गया है कि भारत को कश्मीर में यूएन के मानवाधिकार आयुक्त को आने की इजाजत देनी चाहिए। इसमें यूएन के साथ ही ब्रिटिश संसद की तरफ से जारी एक रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया है जिसमें कश्मीर में मानवाधिकार के हालात पर गंभीर चिंता जताई गई है।

विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहा है। भारत में हिंसा भड़काने के लिए भी वह आतंकियों को भेजने के साथ ही हर तरह की तरकीब इस्तेमाल कर रहा है। वह जिस कश्मीर की बात करता है उसके लोगों के खून से ही उसके हाथ रंगे हुए है।

पाकिस्तान को मानवाधिकार पर भी लेक्चर देने की जरुरत नहीं है क्योंकि उसे अपने भीतर और खासतौर पर पाक अधिकृत कश्मीर में मानवाधिकार के मुद्दे पर इसे उठाना होगा, लेकिन भारत की सरकार व जनता उसके हर खतरनाक इरादे को अभी तक असफल करती आई है और उसे आगे भी करती रहेगी। कुरैशी ने जिस तरह से कश्मीरी अलगाववादी नेता से बात करने की कोशिश की है उससे साफ है कि वह शांति की जो बात करता है वह सिर्फ दिखावा है।

जानकारों का कहना है कि यह बहुत कुछ कुरैशी की तरफ से पाक सेना के सामने अपने आपको को ज्यादा कश्मीर समर्थक व भारत विरोधी बताने की कोशिश भी है। पहले से ही पाकिस्तान के समाचार पत्रों में इस तरह की खबरें आ रही है कि पाक सेना की नजर में कुरैशी ज्यादा महत्वपूर्ण है।

कुरैशी जब पूर्व सरकार में विदेश मंत्री थे तब भी उन्होंने भारत विरोधी स्टैंड अपनाया था। इस बार भी वह कुछ ऐसा ही कर रहे हैं क्योंकि एक तरफ पीएम इमरान खान बार-बार भारत के साथ दोस्ताना रिश्ते की बात कर रहे हैं जो पाकिस्तान सेना को बहुत रास नहीं आ रही है।

 

Posted By: Bhupendra Singh

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप