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डीएमके ने कांग्रेस को फिर बताया धोखेबाज, कहा- हथियाना चाहती युवाओं का आंदोलन

Published: Sat, 17 Oct 2026 08:49 PM (IST)

डीएमके ने कांग्रेस को एक बार फिर धोखेबाज बताया है, आरोप लगाया कि वह युवाओं के आंदोलन को हथियाने की ...और पढ़ें

डीएमके का कांग्रेस पर बड़ा हमला (फाइल फोटो)

डीएमके का कांग्रेस पर बड़ा हमला (फाइल फोटो)

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में डीएमके का हाथ झटक कर विजय की पार्टी टीवीके साथ सरकार बनाने पर कांग्रेस को धोखेबाज और पीठ में छुरा घोंपने वाला बता चुकी डीएमके ने उसे फिर आड़े हाथों लिया है।

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की अगुवाई में एसआइआर विरोधी आंदोलन का चेहरा बनने की कोशिश कर रही कांग्रेस को आईना दिखाते हुए एमके स्टालिन की पार्टी ने उस पर युवाओं का आंदोलन हथियाने का आरोप लगाया है।

दोहरे मापदंड का आरोप लगाते हुए सवाल खड़ा किया है कि यदि कांग्रेस एसआइआर के विरोध में है तो तमिलनाडु और केरल में विधानसभा चुनाव में रुख अलग क्यों था? तब पार्टी चुप क्यों थी?

वैसे यह सवाल द्रमुक के लिए भी है कि एसआईआर का विरोध है तो कोर्ट में ऐसी याचिका क्यों नहीं दी है।

ध्यान रहे कि आईएनडीआई नेताओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट में जो याचिका दी गई उसमें भी एसआईआर खारिज करने की बात नहीं कही गई है। द्रमुक संसदीय दल की बैठक शनिवार को चेन्नई में हुई। इस बैठक के निर्णयों की संक्षिप्त जानकारी स्वयं पूर्व मुख्यमंत्री व द्रमुक अध्यक्ष एमके स्टालिन ने एक्स पर साझा की।

उन्होंने लिखा, मतदान के अधिकार से वंचित न करें! हमें फिर से बैलेट सिस्टम चाहिए! बैठक के चार प्रस्तावों के बारे में उन्होंने बताया कि संसद सदस्यों की इस बैठक में यह प्रस्ताव पारित किए गए। एसआईआर पूरी तरह रद करें, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बर्खास्त करें और जांच कराएं, लोकतंत्र के लिए लड़ रहे छात्रों के आंदोलनों को पूरा समर्थन, ईवीएम की जगह फिर से बैलेट व्यवस्था लाएं।

साथ ही कांग्रेस के रुख और टीवीके की चुप्पी की कड़ी निंदा। बताया गया है कि एमके स्टालिन ने स्पष्ट रूप से कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन का समर्थन करते हुए कांग्रेस को एक बार फिर धोखेबाज करार दिया। दोहराया कि डीएमके कांग्रेस के साथ मिलकर किसी भी गतिविधि में हिस्सा नहीं लेगी, क्योंकि वह पीठ में छुरा घोंपने वाली पार्टी है।

यही नहीं, डीएमके ने कांग्रेस पर यह आरोप भी लगाया कि वह एक ऐसे आंदोलन को हथियाने की कोशिश कर रही है, जिसे छात्रों और युवाओं के कारण मजबूती मिली। पार्टी नेताओं का दावा है कि कांग्रेस शुरुआत में सीजेपी के विरोध प्रदर्शन से दूरी बनाए हुए थी, लेकिन इसे सफल होते देख समर्थन में आ गई।

बता दें कि पिछले दिनों राहुल गांधी ने पार्टी की बैठक के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया था कि एसआइआर का विरोध उसी ने शुरू किया और आज जो भी आंदोलन खड़ा हुआ है, वह कांग्रेस की मेहनत का परिणाम है।

वहीं, डीएमके का दावा है कि बिहार में एसआईआर के दौरान ही उसने सबसे पहले आवाज उठाई, जबकि कांग्रेस केरल और तमिलनाडु में चुप रही और जिस टीवीके के साथ कांग्रेस सरकार में शामिल हुई है, उसके प्रमुख व राज्य के वर्तमान मुख्यमंत्री विजय भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार या भाजपा पर सीधे प्रहार से बचते रहे हैं।