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दिव्या मित्तल ही नहीं, राजनीति में इन टॉप 10 पूर्व IAS-IPS की भी एंट्री; Interesting है स्टोरी

Published: Thu, 15 Oct 2026 09:34 PM (IST)Updated: Thu, 15 Oct 2026 10:29 PM (IST)

पूर्व IAS दिव्या मित्तल ने अपनी पार्टी 'जन नीति भारत' लॉन्च कर 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव लड़ने की घोषणा ...और पढ़ें

दिव्या मित्तल ने 'जन नीति भारत' पार्टी लॉन्च कर राजनीति में कदम रखा।

दिव्या मित्तल ने 'जन नीति भारत' पार्टी लॉन्च कर राजनीति में कदम रखा।

HighLights

  1. दिव्या मित्तल ने 'जन नीति भारत' पार्टी लॉन्च कर राजनीति में कदम रखा।

  2. कई पूर्व IAS-IPS अधिकारी सरकारी सेवा छोड़ राजनीति में सक्रिय हुए।

  3. यशवंत सिन्हा और अरविंद केजरीवाल जैसे नाम भी इस सूची में शामिल हैं।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पूर्व IAS दिव्या मित्तल ने गुरुवार को अपनी पार्टी जन नीति भारत लॉन्च की और घोषणा की कि यह 2027 का उत्तर प्रदेश विधानसभा से चुनाव लड़ेंगी।

उन्होंने यह घोषणा सिविल सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के लगभग एक महीने बाद की है। दिव्या मित्तल ने सोशल साइट X पर एक वीडियो पोस्ट कर अपनी नई पार्टी बनाने की घोषणा की है।

दिव्या मित्तल ने अपनी पार्टी की घोषणा करने के बाद अपना नाम उन लोगों की सूची में शामिल कर लिया है जिन्होंने अपनी तय सेवानिवृत्ति से पहले ही सरकारी सेवा छोड़कर राजनीति का रुख किया। चलिए कुछ ऐसे पूर्व सिविल सेवकों के बारे में जानते हैं जिन्होंने अपनी सेवा पूरी होने से पहले ही राजनीति में अपना कदम रख दिया था।

1. यशवंत सिन्हा

यशवंत सिन्हा ने 1984 में भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देकर सक्रिय राजनीति में कदम रखा था। वह जनता पार्टी में शामिल हुए और उसके बाद जनता दल से जुड़े फिर BJP में आ गए। सिन्हा 1990-91 में चंद्रशेखर सरकार में केंद्रीय वित्त मंत्री के रूप में कार्यरत रहे थे। उनके राजनीतिक करियर में लोकसभा और राज्यसभा की सदस्यता भी शामिल रही। 2021 में वह TMC में शामिल हो गए। 2022 के राष्ट्रपति चुनाव में वे विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरे।

2. अजीत जोगी

अजीत जोगी ने राजनीति में आने के लिए 1986 में IAS छोड़ दिया और कांग्रेस में शामिल हो गए। जोगी को सबसे बड़ी राजनीतिक सफलता 2000 में मिली, जब मध्य प्रदेश से अलग करके छत्तीसगढ़ राज्य बनाया गया। वे इस नए राज्य के पहले मुख्यमंत्री बने और 2003 तक इस पद पर रहे।

2016 में जोगी ने कांग्रेस पार्टी छोड़कर जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ नाम की एक नई पार्टी बनाई, जिसका मकसद एक स्वतंत्र क्षेत्रीय राजनीतिक मंच तैयार करना था।

3. मणिशंकर अय्यर

मणिशंकर अय्यर ने 1989 में भारतीय विदेश सेवा से इस्तीफा दे दिया। वे दो दशकों से ज्यादा समय तक राजनयिक रहे और अपने करियर का कुछ हिस्सा राजीव गांधी के कार्यकाल में प्रधानमंत्री कार्यालय में प्रतिनियुक्ति पर बिताया। अय्यर कांग्रेस में शामिल हुए और 1991 में तमिलनाडु की मयिलादुथुराई लोकसभा सीट से चुनाव जीते।

4. अरविंद केजरीवाल

अरविंद केजरीवाल ने 2006 में भारतीय राजस्व सेवा से इस्तीफा दे दिया। वे सूचना का अधिकार आंदोलन से जुड़े और नागरिकों की समस्याओं के समाधान के लिए 'परिवर्तन' नाम का एक गैर-सरकारी संगठन बनाया।

2012 में, केजरीवाल ने 'आम आदमी पार्टी' की स्थापना की। उन्होंने किसी स्थापित पार्टी में शामिल होने के बजाय अपना खुद का राजनीतिक संगठन बनाना चुना। AAP ने 2013 के दिल्ली विधानसभा चुनावों से चुनावी राजनीति में कदम रखा, जिसमें केजरीवाल ने तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को हराया। वे दिसंबर 2013 में दिल्ली के मुख्यमंत्री बने और 2015 तथा 2020 में पार्टी की जीत के बाद फिर से इस पद पर लौटे।

5. केजे अल्फोंस

केजे अल्फोंस ने 2006 में IAS से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली और केरल में चुनावी राजनीति में कदम रखा। उन्होंने केरल की कांजिरापल्ली विधानसभा सीट से लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट के समर्थन वाले निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।

बाद में, 2011 में BJP में शामिल होने से पहले, अल्फोंस ने 'जन शक्ति' मंच की स्थापना की। इसके बाद उनका राजनीतिक सफर उन्हें संसद तक ले गया, जहां वे राज्यसभा के सदस्य बने।

2017 में, उन्हें नरेंद्र मोदी सरकार में पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में शामिल किया गया, साथ ही, उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग का कार्यभार भी संभाला।

6. सत्यपाल सिंह

महाराष्ट्र कैडर के 1980 बैच के आईपीएस अधिकारी सत्यपाल सिंह ने लोकसभा चुनाव से पहले मुंबई पुलिस आयुक्त के रूप में कार्य करते हुए जनवरी 2014 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का विकल्प चुना। 2014 में उन्होंने बीजेपी की ओर से उत्तर प्रदेश की बागपत लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा और राष्ट्रीय लोक दल प्रमुख अजीत सिंह को हराया। उन्होंने 2019 के आम चुनाव में निर्वाचन क्षेत्र बरकरार रखा।

7. ओपी चौधरी

2005 बैच के IAS अधिकारी ओपी चौधरी ने राजनीति में प्रवेश करने के लिए रायपुर कलेक्टर के रूप में कार्य करते हुए 2018 में सेवा से इस्तीफा दे दिया था। वह भाजपा में शामिल हो गए और उसी वर्ष छत्तीसगढ़ में खरसिया विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा।

चौधरी वह चुनाव हार गए लेकिन 2023 में चुनावी मुकाबले में लौट आए और इस बार रायपुर शहर दक्षिण सीट से जीत हासिल की। बाद में उन्हें छत्तीसगढ़ सरकार में मंत्री के रूप में शामिल किया गया।

8. अपराजिता सारंगी

ओडिशा कैडर की 1994 बैच की आईएएस अधिकारी अपराजिता सारंगी ने केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय में संयुक्त सचिव के पद पर रहते हुए 2018 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली।

वह उसी साल नवंबर में BJP में शामिल हुईं और 2019 का लोकसभा चुनाव भुवनेश्वर से लड़ा। सारंगी ने बीजू जनता दल के उम्मीदवार अरूप पटनायक को हराकर सीट जीती।

उन्होंने 2024 के आम चुनाव में निर्वाचन क्षेत्र बरकरार रखा और खुद को ओडिशा में भाजपा नेता के रूप में स्थापित किया।

9. एके शर्मा

गुजरात कैडर के 1988 बैच के आईएएस अधिकारी एके शर्मा ने अपनी निर्धारित सेवानिवृत्ति से लगभग 18 महीने पहले जनवरी 2021 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली।इसके बाद शर्मा भाजपा में शामिल हो गए और उत्तर प्रदेश विधान परिषद के लिए चुने गए। बाद में वह शहरी विकास और ऊर्जा सहित विभागों को संभालते हुए योगी आदित्यनाथ सरकार में मंत्री बने।

10. असीम अरुण

1994 बैच के IPS अधिकारी असीम अरुण ने कानपुर पुलिस आयुक्त के रूप में कार्य करते हुए जनवरी 2022 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली। इसके बाद, वह उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हो गए। अरुण ने कन्नौज विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। बाद में उन्हें योगी आदित्यनाथ की सरकार में शामिल कर लिया गया।

11. के अन्नामलाई

कर्नाटक कैडर के 2011 बैच के IPS अधिकारी के अन्नामलाई ने अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले सितंबर 2019 में पुलिस सेवा से इस्तीफा दे दिया था। बल छोड़ने से पहले उन्होंने उडुपी और चिक्कमगलुरु जिलों में पुलिस अधीक्षक के रूप में कार्य किया था।