नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। सरकार ने बैठे-बिठाए अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मार ली। भारतीय सैनिकों की हत्या में पाकिस्तानी सेना को क्लीन चिट देकर रक्षामंत्री एके एंटनी ने जहां मुख्य विपक्ष भाजपा को उसके मनपसंद 'राष्ट्रवाद' का मुद्दा दे दिया, वहीं एकजुट हुए विपक्ष के हमलावर रुख को देखते हुए सरकार रक्षात्मक हो गई है।

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बुधवार शाम प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भाजपा नेताओं की बैठक बुलाकर माहौल अनुकूल करने की कोशिश की लेकिन, विपक्ष इस मुद्दे पर अपनी तरफ से जरा भी ढील छोड़ने के मूड में नहीं है। भाजपा ने सदन में एंटनी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की भी शिकायत की है।

एंटनी ने कहा, अब पूरी जानकारी के बाद ही दूंगा कोई बयान

पाकिस्तान को क्लीन चिट दिए जाने के मुद्दे पर गंभीर आपत्ति जताते हुए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज से लेकर बाहर लालकृष्ण आडवाणी और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने एक स्वर में सरकार को कठघरे में खड़ा किया। राजग के अलावा बसपा और जदयू जैसे दूसरे दलों ने भी एंटनी के बयान पर आपत्ति जताई।

सभी नेताओं ने पाकिस्तान को क्लीन चिट दिए जाने पर एंटनी से माफी की मांग की। लोकसभा में बैठे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पास तत्काल बचाव के लिए बोलने को कुछ नहीं था। शायद सरकार को भी इसका अहसास हो गया था कि गलती हो चुकी है।

पाक ने फिर की फायरिंग, भारतीय सेना ने भी दिया जवाब

सुषमा और आडवाणी से लेकर जेटली और रविशंकर प्रसाद ने सरकार से पूछा कि आखिर पाकिस्तान को बचाने की जरूरत क्यों पड़ी? सेना के बयान में माना गया था कि पाकिस्तानी सैनिकों के साथ कुछ आतंकियों ने भारतीय सैनिकों पर हमला किया था। खुद एंटनी के लिखित बयान के शीर्षक में पाकिस्तानी सैनिकों की बात कही गई है। फिर बयान के अंदर सिर्फ आतंकियों के सिर ठीकरा फोड़कर पाकिस्तानी सैनिकों को बचाने की कोशिश क्यों की गई।

रविशंकर ने कहा कि कुछ महीने पहले पाकिस्तानी फौज ने भारतीय सैनिकों का सिर कलम कर दिया था, तो मनमोहन सिंह ने कहा था कि अब पाकिस्तान के साथ सामान्य रिश्ते नहीं रह सकते हैं। फिर क्या हुआ कि सैनिकों की शहादत भूलकर सरकार पाक को बचाव का रास्ता दे रही है। सरकार अपनी सेना का मनोबल गिरा रही है। भाजपा के सभी नेताओं ने आगाह किया कि सरकार को फिलहाल पाकिस्तान से साथ बातचीत नहीं करनी चाहिए।

जाहिर है कि पिछले दो दिनों से शांत बैठे विपक्ष को सरकार ने ही हथियार दे दिया है। मानसून सत्र का काल बहुत लंबा नहीं है, जबकि सरकार कुछ जरूरी विधेयकों को पारित करवाना चाहती है। संकेत है कि वर्तमान माहौल में भाजपा एंटनी की माफी से कम पर तैयार नहीं है। दोनों ही स्थितियों में यह विपक्ष की जीत होगी।

पेश है इसपर राजनीतिक दल के नेताओं की प्रतिक्रिया:---

--- रक्षा मंत्री एके एंटनी के बयान और रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी बयान में अंतर है।

लालकृष्ण आडवाणी

--- हमारे रक्षा मंत्री ने इस मामले में पाकिस्तान को क्लीन चिट दे दी, उन्हें देश से माफी मांगनी चाहिए।

सुषमा स्वराज

--- हमे जो सूचना मिली थी उसी आधार पर हमने संसद में बयान दिया। सेना प्रमुख के जम्मू दौरे के बाद इस बारे में संसद को जानकारी दूंगा।

एके एंटनी

---रक्षा मंत्री का बयान हर तरह से सही है। सेना की ओर से दी गई जानकारी के बाद पूरी तरह से सोच विचार कर दिया गया बयान है। रक्षा मंत्री द्वारा माफी मांगने का प्रश्न नहीं उठता।

सलमान खुर्शीद

--- रक्षा मंत्री द्वारा संसद में दिया गया बयान हास्यास्पद है। हमने इस बारे में विशेषाधिकार हनन का नोटिस स्पीकर के पास भेज दिया है। सेना का कहना है कि हमला पाक सैनिकों की ओर से किया गया। पाकिस्तान के साथ वार्ता बंद होनी चाहिए विशेष कर प्रधानमंत्री को तो बात नहीं ही करनी चाहिए।

यशवंत सिन्हा

--- बहुत दुख की बात है, जब पूरा देश पांच सैनिकों की शहादत को लेकर शोक मना रहा है, किस प्रकार की राजनीति हो रही है।

मनीष तिवारी

----क्या हमें रक्षा मंत्री के इस बयान के तथ्यों पर विश्वास करना चाहिए।

रविशंकर प्रसाद

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