2018 में एमजे अकबर के बाद अब धर्मेंद्र प्रधान, 8 साल में दूसरी बार विवाद की वजह से मंत्री का इस्तीफा
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नीट पेपर लीक विवाद के चलते अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यह मोदी ...और पढ़ें

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। (फाइल)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नीट पेपर लीक विवाद पर आखिरकार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। लेकिन यह अपने आप में दुर्लभ घटना है जब विवाद के कारण मोदी सरकार में किसी मंत्री ने इस्तीफा दिया हो। इससे पहले 17 अक्तूबर, 2018 में विवाद की वजह से ही एमजे अकबर को विदेश राज्य मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, पेपर लीक के खिलाफ कॉककोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हो रहे प्रदर्शनों की बड़ी जीत है, जिसका केंद्र दिल्ली का जंतर-मंतर था।
CJP ने की थी इस्तीफे की मांग
सरकार ने प्रदर्शनकारियों की अन्य मांगों को मानने का भरोसा दिया था। उसमें, नीट पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देना और इस हफ्ते की शुरुआत में संसद तक मार्च में शामिल लोगों को खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई न करना। फिर भी प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़े रहे।
इधर, सीजेपी ने इस्तीफे को बातचीत के अगले दौर के लिए एक शर्त भी बना दिया था, जो आज है।
धर्मेंद्र प्रधान ने ली पेपर लीक की जिम्मेदारी
इस्तीफा देने के बाद, प्रधान ने कहा कि उन्होंने नीट पेपर लीक की पूरी जिम्मेदारी ली और कभी भी स्थिति से मुंह नहीं मोड़ा, लेकिन जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने बाधाएं पैदा करने और छात्रों को गुमराह करने की कोशिश की।
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा
धर्मेंद्र प्रधान में 'एक्स' पर पोस्ट में लिखा, "जंतर-मंतर और पूरे देश की स्थिति को देखते हुए, जिसका मकसद देश-विरोधी ताकतों को इनका फायदा उठाने से रोकना, राष्ट्रीय एकता बनाए रखाना, यह सुनिश्चित करना कि किसी भी भारतीय छात्र का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में न फंसे, और हमारे बच्चों को अपनी पढ़ाई पर समय देने और अपना करियर बनाने पर ध्यान केंद्रित करने देना है। मैंने माननीय प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंप दिया है।"
