नई दिल्ली, आनलाइन डेस्क। राज्य सभा के चार मनोनीत सदस्यों की घोषणा प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को की। घोषित चारो सदस्य दक्षिण भारत के हैं। इनमें से एक कर्नाटक के धर्माधिकारी डाक्टर वीरेंद्र हेगड़े भी हैं। हेगड़े का जन्म 25 नवम्बर, 1948 को कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ स्थित बंटवाल तालुका में हुआ था। हेगड़े जो कि 73 वर्ष के हैं और धर्मस्थल मंदिर के धर्माधिकारी हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हेगड़े एक उदार समाजसेवी भी हैं। बताया जाता है कि हेगड़े को अनेकों पुरस्कारों से विभूषित किया जा चुका है।

राज्य सभा जो कि भारतीय संसद का उच्च सदन होता है। ऐसे में उम्मीद की जाती है कि इसमें जो भी सदस्य आएगा वो बेहद समझदार और परोपकारी होगा। प्रधानमंत्री ने जब बुधवार को मनोनीत नामों की घोषण की तो उसमें ऐसा ही एक नाम था धर्माधिकारी डाक्टर वीरेंद्र हेगड़े का। अटल सरकार में धर्माधिकारी हेगड़े को सन 2000 में पद्म भूषण जैसे सम्मानित सम्मान से सुशोभित किया गया। बतौर समाजसेवी और दानता उदारता के लिए हेगड़े केवल कर्नाटक के लिए ही नहीं बल्कि पूरे भारतवर्ष के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट कर इस बात की बधाई दी कि धर्माधिकारी हेगड़े का काम समूचे भारतवर्ष में उत्तम है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कर्नाटक के धर्मस्थल मंदिर के धर्माधिकारी हेगड़े अब संसद की उच्च सदन की भी गरिमा बढ़ाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट के जरिए दक्षिण भारत के हेगड़े समेत चारों मनोनीत सदस्यों को बधाई दी। जिनमें तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, केरल और कर्नाटक के मनोनीत सदस्य हैं। खेल, फिल्म, सगीत और समाजसेवा से जुड़े पीटी उषा, इलैयाराजा, वी विजेंद्र प्रसाद और धर्माधिकारी वीरेंद्र हेगड़े का नाम प्रमुख है। इन सबने अपने-अपने क्षेत्रों में महत्वपूर्ण काम किया है।

दिगंबर समुदाय से आने वाले धर्माधिकारी हेगड़े, धर्माधिकारी रत्नवर्मा हेगड़े के बेटे हैं। दरअसल, धर्माधिकारी हेगड़े पुश्तैनी तौर पर श्री धर्मस्थल मंजुनाथ स्वामी मंदिर के ट्रस्टी हैं। धर्माधिकारी हेगड़े का कद इसी बात से बढ़ जाता है कि जैन समुदाय के होते हुए भी वे हिंदु धर्म के मंदिरों के भी ट्रस्टी हैं।

तमाम उपलब्धियों के साथ ही धर्माधिकारी हेगड़े अपने जैन समुदाय की प्राचीन व्यवस्था को बरकरार रखे हुए हैं। शिक्षा, चिकित्सा, योग सरीखे लोगों के जीवन को बदलने वाले सभी क्षेत्रों में धर्माधिकारी हेगड़े उत्कृष्ट काम करते रहे हैं। तथ्यों के हवाले से लगभग चार सौ स्कूल और अध्यापक प्रति वर्ष तीस हजार बच्चों को तमाम जरूरी विषयों में दक्ष करते हैं।

Edited By: Deepak Yadav