नई दिल्ली। राजनीतिक पार्टी के तौर पर शिवसेना और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना [मनसे] की मान्यता रद करने की मांग की गई है। दोनों पार्टियों के आला नेताओं पर नफरत फैलाने वाले बयान देने के आरोप लगाते हुए इस बाबत सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है। शीर्ष न्यायालय ने इस पर चुनाव आयोग से जवाब मांगा है।

जस्टिस आरएम लोढ़ा और एआर दवे की पीठ ने शुक्रवार को नोटिस भेज चुनाव आयोग से याचिका पर अपना नजरिया रखने को कहा है। एडवोकेट बृजेश कलापा की ओर से दाखिल की गई इस याचिका में कहा गया है कि मनसे प्रमुख राज ठाकरे और शिवसेना के कार्यकारी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे कई मौकों पर उत्तर भारतीयों के खिलाफ जहर उगल चुके हैं। बीते साल अक्टूबर में राज ठाकरे के बयान से बिहार के लोगों के लिए मुंबई में समस्याएं खड़ी हो गई थीं। याचिका में दोनों नेताओं को आरोपी बनाया गया है, लेकिन कोर्ट ने चुनाव आयोग से ही जवाब मांगा है।

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