जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। कोविड-19 के प्रकोप के दौरान गरीबों को मुफ्त अनाज देने वाले आत्मनिर्भर भारत पैकेज समेत राशन प्रणाली की शुक्रवार को यहां आयोजित खाद्य मंत्रियों की समीक्षा बैठक में नए राशन कार्ड बनाने की मांग उठी। बिहार ने राज्यों की ओर से यह मुद्दा जोर शोर से उठाया। खाद्य मंत्रालय ने इसके लिए अपनायी जाने वाली प्रक्रिया तक इंतजार करने को कहा। केंद्रीय खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने सभी राज्यों को भरोसा दिया कि इस मुश्किल समय में गरीबों को अनाज की आपूर्ति होती रहेगी।

समीक्षा बैठक में देश के सभी राज्यों के खाद्यान्न मंत्रियों ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से हिस्सा लिया। इस दौरान राशन प्रणाली पर वितरित किए जा रहे अनाज व दाल के वितरण पर राज्यों ने संतोष जताया। बिहार जैसे राज्य की ओर से कहा गया कि उसके यहां 1.5 करोड़ गरीब जनता के पास राशन कार्ड नहीं है। बिहार के प्रतिनिधि ने दूसरे राज्यों को भी इसके लिए प्रोत्साहित किया। केंद्र की ओर से इस बारे में पहले ही स्पष्ट कर दिया गया है कि इसके लिए आगामी जनगणना के आंकड़ों के आने के बाद ही प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। कानूनी व संवैधानिक प्रक्रिया के तहत कार्यवाही आगे बढ़ायी जाएगी। इस दौरान किसी गरीब को अनाज की दिक्कत नहीं आने दी जाएगी।

वन नेशन वन राशन कार्ड योजना पर हुई विस्तृत चर्चा

बैठक में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए), प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना और आत्मनिर्भर भारत पैकेज के साथ वन नेशन-वन राशन कार्ड जैसी योजनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। कोविड-19 के कारण लागू देशव्यापी लाकडाउन के दौरान लोगों को राशन प्रणाली पर अनाज के वितरण के लिए केंद्र की तत्परता से की गई पहल की सभी राज्यों ने सराहना की। केंद्रीय उपभोक्ता मामले व खाद्य मंत्री राम विलास पासवान ने केंद्रीय एजेंसियों में एफसीआई और नैफेड प्रबंधन के प्रति आभार जताया। अनाज के वितरण में उन गरीबों को भी प्राथमिकता दी गई, जो किसी भी कल्याण योजना के दायरे में रजिस्टर्ड नहीं हैं। हालांकि ऐसे लोगों को अनाज वितरण प्रणाली में शामिल किए जाने को लेकर बिहार की ओर से जोर शोर से आवाज उठाई गई।

आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत विभिन्न राज्यों में फंसे आठ करोड़ प्रवासी मजदूरों को मुफ्त भोजन मुहैया कराने का प्रावधान किया गया है। खाद्य मंत्रालय की ओर से ऐसे लोगों के लिए आठ लाख टन गेहूं व चावल जारी किया जा चुका है। ऐसे लोगों के अपने ठिकानों पर पहुंच जाने के बाद मई और जून में प्रत्येक व्यक्ति को पांच-पांच किलो गेहूंं अथवा चावल के साथ दालें मुहैया कराई जा रही हैं। इस मद में अब तक 17 राज्यों ने अनाज का उठाव कर लिया है। पासवान ने बाकी राज्यों से भी अपने हिस्से का अनाज समय से उठा लेने का आग्रह किया।

Posted By: Dhyanendra Singh

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस