नीलू रंजन, नई दिल्ली। Delhi Mumbai Expressway: दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे पूरी तरह तैयार होने के बाद कार्बन उत्सर्जन को कम करने में अहम भूमिका निभाएगा। इससे वाहनों से होने वाले कार्बन डाइआक्साइड उत्सर्जन कम होने का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इतने कार्बन डाइआक्साइड को आक्सीजन में बदलने के लिए चार करोड़ से अधिक पेड़ की जरूरत पड़ेगी।

मार्च 2023 तक हो जाएगा तैयार

सड़क, परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, इस एक्सप्रेस से दिल्ली से मुंबई के बीच की दूरी 12 घंटे में तय की जा सकेगी, जिसमें अभी 24 घंटे लगते हैं। मंत्रालय के अनुसार एक्सप्रेस मार्च 2023 तक चालू कर दिया जाएगा। सड़क, परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे पेट्रोल-डीजल की खपत कम कर विदेशी मुद्रा को भी बचाने में सहायक होगा।

हर साल 32 करोड़ लीटर ईंधन की होगी बचत

मंत्रालय के अनुमान के मुताबिक, इस एक्सप्रेस वे से हर साल 32 करोड़ लीटर ईंधन की बचत होगी। 32 करोड़ लीटर ईंधन की खपत से वायुमंडल में 85 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइआक्साइड का उत्सर्जन होता, जिसे रोकने में सफलता मिलेगी। चार करोड़ पेड़ के बराबर वायुमंडल से कार्बन डाइआक्साइड कम करने के अलावा एनएचएआइ एक्सप्रेस के किनारे 20 लाख पेड़ लगाएगी, जो हवा की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने का काम करेगा।

पर्यावरण और जंगली जीव जंतुओं पर कम पड़ेगा दुष्प्रभाव

मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार वायु गुणवत्ता के लिए सकारात्मक नतीजों के साथ-साथ पूरे एक्सप्रेस का डिजाइन इस तरह से तैयार किया गया है कि इसका पर्यावरण और जंगली जीव जंतुओं पर दुष्प्रभाव कम पड़ेगा। यह एशिया का पहला और दुनिया का दूसरा ऐसा एक्सप्रेस वे होगा, जिससे रास्ते में आने वाले जंगली जीव-जंतुओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने का पूरा प्रबंध किया गया है।

उसके लिए पांच स्थानों पर कुल सात किलोमीटर लंबा ओवरपास बनाया जाएगा। यानी जंगल में पूरा एक्सप्रेस वे पिलर पर खड़ा होगा और उसके नीचे से जंगली जीव-जंतु आसानी से आ-जा सकेंगे। इसके साथ ही राजस्थान के मुकुंदरा सेंचुरी और महाराष्ट्र के माथेरन इको सेंसिटिव जोन में चार-चार किलोमीटर लंबी आठ लेन की टनल भी बनाई जाएगी, ताकि वहां से प्राकृतिक वातावरण को कोई नुकसान नहीं हो।

Edited By: Arun Kumar Singh