नई दिल्ली, जेएनएन। समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर दायर सभी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को स्पष्ट कहा कि यूसीसी बनाने के संबंध में अदालत संसद को कोई निर्देश जारी नहीं करेगी। मुख्य न्यायमूर्ति डीएन पटेल व न्यायमूर्ति सी हरिशंकर की पीठ ने कहा कि यह मामला विधान मंडल से जुड़ा है और अदालत इसमें हस्तक्षेप नहीं करेगी। पीठ ने केंद्र सरकार से जवाब मांगने से भी इन्कार कर दिया।

हालांकि उसने सभी याचिकाओं को स्वीकार करते हुए कहा कि वह सभी की जिरह सुनने को तैयार है। पीठ ने बगैर अनुमति बहस शुरू करने पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) को जिरह से रोक दिया। सुनवाई सोमवार को जारी रहेगी।

31 मई को केंद्र सरकार ने जारी किया था नोटिस

शुक्रवार को सुनवाई के दौरान अधिवक्ता और याचिकाकर्ता अश्वनी कुमार उपाध्याय ने पीठ से कहा कि उनकी याचिका पर अदालत ने 31 मई को केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था, लेकिन अब तक जवाब दाखिल नहीं किया गया। अश्वनी समेत सभी याचिकाकर्ताओं ने केंद्र से जवाब मांगने की मांग की।

देश के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद के पड़पोते व मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू यूनिवर्सिटी के कुलपति फिरोज बख्त अहमद व सामाजिक कार्यकर्ता व पत्रकार अंबर जैदी ने पीठ के समक्ष अपनी दलील पेश की।

सरकार ने आज तक कुछ नहीं किया

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने यूसीसी के पक्ष में कई फैसले दिए हैं, लेकिन सरकार ने इस दिशा में आज तक कुछ नहीं किया। कम से कम केंद्र सरकार को निर्देश दिया जाए कि वह संवैधानिक प्रक्रिया शुरू करे कि संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत यूसीसी की जरूरत है या नहीं।

सभी याचिकाकर्ताओं ने मांग की कि यूसीसी भारत की जरूरत है ताकि राष्ट्रीय एकता के साथ ही लोगों को समान न्याय मिल सके। सभी याचिकाकर्ताओं ने केंद्र सरकार को मामले में न्यायिक आयोग व उच्च सदस्यीय विशेषज्ञों की समिति गठित करने का निर्देश देने की मांग की।

Posted By: Dhyanendra Singh

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप