नई दिल्ली (एजेंसी)। रक्षा मंत्रालय ने बहुप्रतीक्षित 'सामरिक भागीदारी' मॉडल को मोटे तौर पर अंतिम रूप दे दिया है। जल्द ही इसके विस्तृत प्रावधान भी तय कर दिए जाएंगे। इस मॉडल के तहत विदेशी कंपनियों और भारतीय कंपनियों की भागीदारी से देश में पनडुब्बियों और लड़ाकू जेट विमानों का निर्माण किया जाएगा। इसे भारत को रक्षा निर्माण क्षेत्र की बड़ी ताकत बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। इसके मसौदे को अंतिम रूप देने के लिए रक्षा खरीद समिति की इस सप्ताह दो बार बैठक हुई।

रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को जारी एक बयान में कहा कि रक्षा मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में हुई रक्षा खरीद समिति की बैठक में आज 'सामरिक भागीदारी' मॉडल को अंतिम रूप दे दिया गया। शुरू में इसके तहत लड़ाकू विमानों, पनडुब्बियों और बख्तरबंद वाहनों का निर्माण किया जाएगा। बाद में इसके तहत अन्य हथियारों का भी निर्माण किया जाएगा। अब इस मसौदे पर वित्त मंत्रालय विचार करेगा। इसके बाद इसे फैसले के लिए सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति के सामने रखा जाएगा।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह नीति 'मेक इन इंडिया अभियान' को बढ़ावा देगा और इससे रक्षा जैसे अहम क्षेत्र में देश आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ेगा। उल्लेखनीय है कि पिछले सप्ताह जेटली ने लार्सन एंड टुब्रो, अशोक लीलैंड, महिंद्रा एंड महिंद्रा, रिलायंस इन्फ्रा, टाटा समूह, पुंज लॉयड और अडानी समूह के प्रतिनिधियों के साथ इस सिलसिले में बैठक की थी।

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By Kishor Joshi