नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। समुद्र में होने वाले हादसों में अब नौसेना के अफसरों को अपनी जान नही गंवानी पडे़गी। भारतीय नौसेना ने बुधवार को गहन जलमग्न बचाव वाहन (डीएसआरवी) को नौसेना के पश्चिमी कमांड के बेड़े में शामिल कर लिया है। इस वाहन की प्रणाली ने भारतीय नौसेना को विश्व की नौसेना के ऐसे समूह में शामिल कर दिया है, जिनके पास अभिन्न पनडुब्बी बचाव क्षमता है। डीएसआरवी 666 मीटर तक सफलतापूर्वक नीचे जाकर एक गोते में 14 लोगों को बचा सकता है। जो कि भारतीय जल सीमा में मानव निर्मित पोत द्वारा गहन जलमग्न के लिए एक रिकॉर्ड है।

नौसैनिक अधिकारियों के मुताबिक जहां एक पनडुब्बी अहम सामरिक संपदा होती है, वही यह किसी दुर्घटना का भी शिकार हो सकती है। इस दौरान राहत व बचाव कार्य करने की क्षमता नौसेना के पास होनी चाहिये। डीएसआरवी की उपलब्धता हमेशा रहने से हिंद महासागर में भारतीय नौसेना संकट में फंसी पनडुब्बियों के बचाव व राहत के लिये हमेशा तैयार रह सकेगी।

बता दें कि हिंद महासागर में भारतीय समुद्री इलाके की चौकसी के अलावा भारतीय नौसेना डाइविंग सपोर्ट आपरेशन भी करती है। इसके जरिये समुद्री सतह के नीचे निरीक्षण, परीक्षण और बचाव किया जाता है और गोताखोर लंबे वक्त तक समुद्र के भीतर रहते हैं।

अभी तक समुद्र के भीतर किसी सबमरीन के साथ कोई दुर्घटना होती थी तो भारत अमेरिका से मदद लिया करता था। लेकिन यूएस नेवी के अपने साजो सामान के साथ यहां तक पहुंचने में काफी समय लग जाता था और इससे कई जिंदगी भी दाव पर लगी रहती थी। लेकिन डीएसआरवी के आने से भारतीय नौसेना खुद समुद्र के अंदर होने वाले किसी भी दुर्घटना से निपटने में सक्षम हो गई है। गौरतलब है कि डीएसआरवी हासिल करने का ठेका ब्रिटेन की जेम्स फिशर डिफेंस कंपनी के साथ मार्च, 2016 में ही सम्पन्न हुआ था।

नौसेना ने अक्टूबर में ही डीएसआरवी के जांच परीक्षणों को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया था। डीएसआरवी ने 750 मीटर से भी ज्यादा की गहराई में आरओवी (रिमोट संचालित वाहन) को भी ऑपरेट किया था और 650 मीटर से ज्यादा की गहराई में सोनार का प्रयोग किया था। डीएसआरवी के नौसेना के बेड़े मे शामिल होने से बचाव क्षमता को एक नया आयाम मिला है।

आपको बता दें कि अगस्त 2013 में आईएनएस सिंधुरक्षक में हुए विस्फोट से 18 सैनिकों की मौत हो गई थी। वहीं फरवरी 2014 दो लेफ्टिनेंट के भी अपनी जान गंवानी पड़ी थी

Posted By: Manish Negi