अमित शर्मा। फूलों की महक मजहब नहीं देखती, वो कुदरत की नेमत है, जो बस फिजा को खुशनुमा करती है. 'अयोध्या डायरी' में आज हम बात करेंगे फूलों की। तीन दिन अयोध्या की आबो हवा महसूस करने हम (जागरण डॉट कॉम की टीम) पहुंचे, तो फूलों की गंगा जमुनी महक से दूर न रह सके। फैजाबाद (जिसका नाम अब बदलकर अयोध्या ही हो चुका है) से रामजन्मभूमि के आसपास बने असंख्य मंदिरों तक फूलों की भरमार दुकानें हैं।

कोई अजमल फूल भंडार था तो कोई अमीन फूल हाउस

देशभर में फूलों का काम माली समाज के लोग करते हैं, पर अयोध्या आएंगे तो 90 फीसदी मुस्लिम परिवार इस काम में लीन मिलेंगे। फूलों के छोटे-छोटे बागानों से हर रोज फूल अयोध्या पहुंचते हैं और फिर माला, गुलदस्ते समते तमाम सजावटी किस्मों में तब्दील हो जाते हैं। पुराने फैजाबाद की गलियों में भटकते हुए लाइन से फूलों की दुकानें दिखीं, कोई अजमल फूल भंडार था तो कोई अमीन फूल हाउस।

फूलों से जुड़ा सामान्य ज्ञान बढ़ाने की हसरत लिए एक दुकान में जा पहुंचे। अजमतुल निशा सुई में धागा पिरोए गेंदे की माला बुन रहीं थी। उनसे पूछा किस मजार पर या मस्जिद में चढ़ेगी ये माला ? तो उनका जवाब था कि ना.. ये तो मंदिर में श्रृंगार के काम आएगी। अजमतुल को इस बात का फख्र है कि श्रीराम की जन्मभूमि पर बने मंदिरों में श्रद्धालु फूल चढ़ाते हैं, कहीं न कहीं उनकी दुआ भी फूलों के मार्फत श्रीचरणों तक पहुंची है।

कौमी सौहार्द्र की बड़ी मिसाल

सुप्रीम कोर्ट में श्रीराम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद के जमीनी विवाद के मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी है, फैसले का अयोध्या में सबसे ज्यादा इंतजार है। ऐसे में कौमी सौहार्द्र की इससे बड़ी मिसाल क्या होगी कि मुस्लिमों की मेहनत के धागे में हिन्दुओं की आस्था के फूल पिरो कर भगवान को अर्पण होते हैं। निशा कहती हैं कि देशभर से आने वाले श्रद्दालु दुकान के बाहर नाम पढ़ते हैं, उन्हें पता होता है कि ये एक मुस्लिम की दुकान है, फिर भी खरीदते हैं। महंगाई के इस दौर में फूलों की माला के रेट भी ऊपर नीचे होते रहते हैं।

बच्चे सभी फूलों के कारोबार में लगे

डिमांड है तो 40-50 नहीं तो 10 रुपए से ज्यादा नहीं मिलता। कभी किसी मामले में अयोध्या में तनाव बढ़ जाए तो श्रद्धालु कम हो जाते हैं, ऐसे में फूल फेंकने तक पड़ जाते हैं। अजमतुल निशा के शौहर, बच्चे सभी फूलों के कारोबार में लगे हैं। सुप्रीम कोर्ट में कब-कब क्या सुनवाई हुई, ये तबका नहीं जानता, पर अयोध्या में अमन चैन कायम रहे, इसकी दिन रात दुआ करता है। अमन कायम रहेगा तभी दो वक्त की रोटी जितना कमा पाएंगे. अयोध्या में रह रहा, हर 'बाशिंदा', 'निवासी' इसी अमन की 'दुआ', 'प्रार्थना' हर रोज करता है।

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Posted By: Sanjay Pokhriyal

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