मौत की सजा कब दी जाती है? संविधान में है अपराध से धाराओं तक का जिक्र
देश में मौत की सजा देने का क्या प्रविधान है और किन-किन अपराधों के लिए फांसी की सजा दी जाती है, आइए जानते हैं।

BNS की धारओं के तहत भारत में मौत की सजा का कानून (जागरण)
HighLights
मेरठ हत्याकांड में मुस्कान और साहिल को मौत की सजा।
भारत में मृत्युदंड 'दुर्लभतम से दुर्लभ' मामलों में दिया जाता है।
BNS में मृत्युदंड के प्रविधानों का उल्लेख।
साक्षी गुप्ता, नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के शहर मेरठ के नीले ड्रम हत्याकांड में जिला अदालत ने आरोपी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल को मौत की सजा सुनाई है।
मेरठ के सौरभ राजपूत नाम के शख्स की हत्या उसकी ही पत्नी मुस्कान ने कर दी थी। मुस्कान ने अपने प्रेमी साहिल के साथ मिलकर पति की हत्या करके उसके शव के टुकड़े कर सीमेंट से भरे डीले ड्रम में भर दिया था।
मुस्कान और साहिल के इस जघन्य अपराध ने पूरे देश को हैरान कर दिया। इस मामले में आज बुधवार, 14 अक्टूबर को कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए दोनों आरोपियों को मौत की सजा सुनाई है।
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कोर्ट के इस फैसले के बाद ये सवाल सामने आता है कि भारतीय संविधान के तहत मौत की सजा का क्या प्रविधान है और किन-किन मामलों में दोषियों को मौत की सजा दी जाती है।
कब मिलती है मौत की सजा?
- भारतीय संविधान के तहत देश में सुधारवादी सिद्धांत पर काम किया जाता है और इसी आधार पर ही न्यायपालिका फैसला सुनाती हैं। यह सिद्धांत आरोपी को 'दोषी साबित होने तक निर्दोष' मानता है।
- देश में मौत की सजा किसी दोषी व्यक्ति को दी जाने वाली सबसे बड़ी सजा है। मौत की सजा सिर्फ उन्हीं मामलों में दी जाती है, जब अपराध इतना जघन्य हो कि कोई और सजा उस अपराध के लिए कम हो।
- निर्भया रेप केस जैसे मामलों में, अदालत ने सबसे गंभीर या जघन्य अपराधों के लिए मौत की सजा (कैपिटल पनिशमेंट) सुनाई, क्योंकि यह मामला 'दुर्लभतम से दुर्लभ' (rarest of the rare) की श्रेणी में आता था। ऐसे अपराधों के लिए सजा पर अमल फांसी देकर किया जाता है।
- हालांकि, हमारे देश में मौत की सजा बहुत ही कम मामलों में दी जाती है। भारतीय दंड संहिता (IPC) और दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) में मौत की सजा का जिक्र है। जब से यह कानून बना है, भारत में मौत की सजा का इस्तेमाल होता रहा है, हालांकि समय के साथ इसका इस्तेमाल कम हुआ है।
संविधान में क्या है मौत की सजा का प्रविधान?
मौत की सजा, जिसे कैपिटल पनिशमेंट भी कहा जाता है, 'दुर्लभतम से दुर्लभ' मामलों में दी जाती है। भारतीय न्याय संहिता 2023 भारत में मृत्यु दंड के दायरे का काफी विस्तार करती है। मौत की सजा के तहत प्रविधान है कि 'गर्दन में फांसी का फंदा डालकर तब तक लटकाए रखना जब तक मौत न हो जाए।'
निर्भया केस के दोषियों को तिहाड़ जेल में फांसी दी गई थी। अब मेरठ ब्लू ड्रम हत्याकांड मामले में जिला अदालत ने मुस्कान और साहिल को मौत की सजा सुनाई है।
क्रिमिनल प्रोसीजर कोड, 1973 की धारा 354(3) में कहा गया है, 'जब किसी अपराध के लिए दोषी ठहराया जाता है जिसकी सजा मौत या उसके विकल्प के तौर पर उम्रकैद या कुछ सालों की जेल हो सकती है, तो फैसले में सजा देने के कारण बताए जाने चाहिए और मौत की सजा के मामले में, ऐसी सजा देने के खास कारण भी बताए जाने चाहिए।'
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भारतीय दंड संहिता (IPC), 1860 के तहत वे अपराध जिनके लिए मौत की सजा दी गई।
- सती प्रथा रोकथाम अधिनियम का भाग II, धारा 4 - सती प्रथा में मदद या उकसाना।
- नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट की धारा 31A - बार-बार अपराध करने पर ड्रग्स की तस्करी।
| क्र. सं. | BNS की धाराएं | अपराध का विवरण |
|---|---|---|
| 1. | धारा 66 | BNS 2023 बलात्कार के उन मामलों के लिए मृत्युदंड को अनिवार्य बनाता है जहां पीड़िता की मृत्यु हो जाती है या उसे लगातार वानस्पतिक अवस्था में छोड़ दिया जाता है। |
| 2. | धारा 70(2) | सामूहिक बलात्कार के अपराधियों को नए कानून के तहत मौत की सजा हो सकती है। |
| 3. | धारा 71 | एक से अधिक बार बलात्कार के दोषी पाए गए व्यक्तियों को मौत की सजा दी जा सकती है। |
| 4. | धारा 103 | बीएनएस ने हत्या के लिए मौत की सजा बरकरार रखी है। |
| 5. | धारा 104 | हत्या करने वाले आजीवन कारावास के दोषियों को मौत की सजा दी जा सकती है। |
| 6. | धारा 107 | नाबालिग, पागल व्यक्ति या नशे में धुत किसी व्यक्ति को आत्महत्या के लिए प्रोत्साहित करना या सहायता करना मृत्युदंड का कारण बन सकता है। |
| 7. | धारा 109(2) | आजीवन कारावास की सजा पाए कैदी जो हत्या करने और चोट पहुंचाने का प्रयास करते हैं, उन्हें मौत की सजा दी जा सकती है। |
| 8. | धारा 113(2) | आतंकवादी कृत्य करने पर मौत की सजा हो सकती है। |
| 9. | धारा 140(2) | हत्या या फिरौती मांगने के इरादे से किसी का अपहरण या अपहरण करने पर मौत की सजा हो सकती है। |
| 10. | धारा 147 | भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ना, छेड़ने का प्रयास करना या युद्ध को बढ़ावा देना मौत की सजा है। |
| 11. | धारा 160 | वास्तव में किए गए विद्रोह को प्रोत्साहित करने पर मौत की सजा हो सकती है। |
| 12. | धारा 230(2) | झूठे साक्ष्य देना या गढ़ना जिसके परिणामस्वरूप किसी निर्दोष व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, मृत्यु दंडनीय है। |
| 13. | धारा 310(3) | लूट (डकैती) करना जिसके परिणामस्वरूप हत्या हो जाती है, मृत्यु दंडनीय हो सकता है। |
कब-कब दी गई मौत की सजा?
- 14 साल की लड़की के रेप और हत्या के दोषी धनंजय चटर्जी को 2004 में फांसी दी गई थी।
- 2008 के मुंबई आतंकी हमले के दोषी मोहम्मद अजमल अमीर कसाब को 21 नवंबर 2012 को फांसी दी गई थी।
- 1993 के मुंबई धमाकों के दोषी याकूब मेमन को आतंकवाद के अपराध के लिए 30 जुलाई 2015 को फांसी दी गई थी।
- चर्चित निर्भया केस में, चार दोषियों पवन गुप्ता, विनय शर्मा, अक्षय कुमार और मुकेश कुमार को साल 2020 में दिल्ली की तिहाड़ जेल में फांसी दी गई थी।
भारत में मौत की सजा की संवैधानिक वैधता
भारत उन देशों में से एक है जिन्होंने न तो मौत की सजा के प्रविधान को पूरी तरह से हटाया है और न ही इसकी वैधता बताने वाला कोई कानून बनाया है।
भारतीय संविधान के लागू होने के बाद से कई बार सुप्रीम कोर्ट में याचिकाओं के जरिए मौत की सजा की वैधता को चुनौती दी गई है।
जगमोहन सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में, सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने सर्वसम्मति से मौत की सजा की संवैधानिकता को बरकरार रखा और कहा कि यह अनुच्छेद 14, 19 या 21 का उल्लंघन नहीं करता है।
इस मामले में, मौत की सजा की वैधता को इस आधार पर चुनौती दी गई थी कि यह अनुच्छेद 19 और 21 का उल्लंघन करता है क्योंकि इसके लिए कोई प्रक्रिया नहीं बताई गई थी। यह तर्क दिया गया था कि Cr.PC (दंड प्रक्रिया संहिता) में बताई गई प्रक्रिया केवल अपराध साबित करने तक सीमित थी और इसमें मौत की सजा सुनाना शामिल नहीं था।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, 'मौत की सजा का चुनाव कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के तहत किया जाता है। जज ट्रायल के दौरान पेश किए गए हालात, तथ्यों और अपराध की प्रकृति के आधार पर मौत की सजा और उम्रकैद के बीच फैसला करता है।'
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