जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। विशेष परिस्थितियों में अहम और संवेदनशील डेटा तक राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों की पहुंच का विकल्प प्रदान करने वाले और कंपनियों पर देश में ही डेटा रखने का प्रावधान तय करने वाले डेटा प्रोटेक्शन बिल को संसद के मौजूदा सत्र में ही पेश कर सकती है। यह बिल बुधवार को होने वाली केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में पारित हो सकता है।

डेटा को देश में ही रखने का नियम बनाना विधेयक का अहम हिस्सा

पिछले कुछ दिनों से सरकार डेटा की सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा की स्थिति में डेटा तक एजेंसियों की पहुंच बनाने के विकल्प पर विचार कर रही थी। इसके अतिरिक्त लोगों के डेटा को देश में ही रखने का नियम बनाना भी इस विधेयक का एक अहम हिस्सा होगा। सूत्रों के मुताबिक विधेयक में इस क्षेत्र के लिए एक रेगुलेटर बनाने का प्रावधान भी होगा।

विधेयक के मसौदे में हुए कई संशोधन

सरकार ने डेटा प्रोटेक्शन के लिए जस्टिस बीएन श्रीकृष्णा की अध्यक्षता में एक कमेटी बनायी थी। इस कमेटी ने बीते वर्ष अपनी सिफारिशों के साथ डेटा प्रोटेक्शन कानून का मसौदा भी सरकार को सौंपा था। बाद में सरकार ने इसे सार्वजनिक चर्चा के लिए जारी कर इसमें संशोधन किये। अब इसके मसौदे को कैबिनेट की अनुमति के लिए प्रस्तुत किया जा रहा है।

खबरों के मुताबिक, प्रस्तावित विधेयक में डाटा सुरक्षा के नियमों के उल्लंघन पर 15 करोड़ रुपये या कंपनी के कुल टर्नओवर के चार फीसद जुर्माना लगाने का प्रावधान है। पिछले दिनों में वाट्सएप पर डाटा की सुरक्षा में लगी सेंध के बाद सरकार और सतर्क हो गई है। इस मामले को लेकर बवाल मचा था। वाट्सएप मामले में रवि शंकर प्रसाद ने कहा था कि सरकार निजता को गंभीरता से लेती है और सूचना की गोपनीयता इसी का हिस्सा है। बता दें कि सरकार ने पिछले साल विधेयक का मसौदा जारी किया था, जिसका कई वैश्विक कंपनियों ने विरोध किया था। कंपनियों का कहना था कि इससे उनका कारोबार प्रभावित होगा। साथ ही परिचालन व्यय भी बढ़ेगा।

Posted By: Tilak Raj

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