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    उपलब्धियों भरा रहा दलजीत सिंह चौधरी का सेवाकाल, दस्यु आतंक के खात्मे में थी अहम भूमिका

    By NILOO RANJAN KUMAREdited By: Abhishek Pratap Singh
    Updated: Sat, 29 Nov 2025 10:24 PM (IST)

    उत्तर प्रदेश के बीहड़ों में दस्यु गिरोहों के आतंक को खत्म करने में आईपीएस दलजीत सिंह चौधरी की अहम भूमिका रही। उन्हें वीरता के लिए चार बार राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया गया। डीजी बीएसएफ के रूप में सेवानिवृत्त हुए चौधरी ने इटावा और कानपुर में दस्यु उन्मूलन के लिए विशेष अभियान चलाए। उन्होंने कई कुख्यात डकैतों का सामना किया और उन्हें आत्मसमर्पण करने पर मजबूर किया। उनका कार्यकाल कई महत्वपूर्ण उपलब्धियों से भरा रहा।

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    यूपी कैडर के आईपीएस अधिकारी (1990 बैच) दलजीत सिंह चौधरी का रिटायरमेंट।

    नीलू रंजन, नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश से लेकर मध्य प्रदेश के बीहड़ों में कभी आतंक का पर्याय रहे दस्यु गिरोह भले ही अब दफन हो चुके हैं पर उनके खात्मे का जिक्र आते ही यूपी कैडर के आईपीएस अधिकारी (1990 बैच) दलजीत सिंह चौधरी का नाम सबसे पहले आता है।

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    कुख्यात निर्भय गुर्जर से लेकर कई दस्यु सरगनाओं के खात्मे में उनकी भूमिका को हटाकर पुलिस वीरता की कहानी नहीं लिखी जा सकती। बहादुरी के लिए उन्हें चार बार राष्ट्रपति के वीरता पदक (गैलेंट्री) से सम्मानित किया गया। सेवानिवृत्ति के दिन 30 नवंबर तक वे डीजी बीएसएफ (सीमा सुरक्षा बल) के रूप में छत्तीसगढ़ के रायपुर में आयोजित डीजीपी-आईजी सम्मेलन में देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए अपना योगदान देते रहे। 28 से 30 नवंबर तक आंतरिक सुरक्षा के सबसे बड़े सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सराहनीय कार्यों के लिए उनकी पीठ भी थपथपाई।

    निशानेबाज के रूप में बनाई पहचान

    कार्यकाल के अंतिम दिन डीजीपी सम्मेलन में भाग ले रहे दलजीत चौधरी के लिए बीएसएफ में परंपराओं से हटकर चार दिन पहले विदाई परेड का आयोजन किया गया था। बीएसएसी और एलएलबी की पढ़ाई करने वाले दलजीत चौधरी को 35 वर्ष की सेवा में चार वीरता पदक के साथ अति उत्कृष्ट व सराहनीय सेवाओं के लिए राष्ट्रपति के पदक से सम्मानित किया गया। एक निशानेबाज के रूप में भी उनकी विशिष्ट पहचान रही।

    दलजीत चौधरी की उपलब्धियां

    • आईपीएस के रूप में चौधरी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में एसपी और एसएसपी के रूप में तैनात रहे। इटावा में 20 जुलाई, 2004 से 19 जनवरी, 2006 तक एसएसपी रहते हुए उन्होंने दस्यु आतंक के खात्मे की जंग छेड़ी थी।
    • वह 19 जनवरी, 2006 से 14 मई, 2007 तक डीआइजी कानपुर रेंज के पद पर भी तैनात रहे और दस्यु उन्मूलन का अपना अभियान जारी रखा। तब दस्यु निर्भय गुर्जर के अलावा अरविंद गुर्जर, रज्जन गुर्जर, सलीम गुर्जर, जगजीवन परिहार व अन्य सक्रिय थे।
    • इटावा के एसएसपी व कानपुर रेंज के डीआईजी के रूप में उन्होंने 50 से अधिक डकैतों का सामना किया, जिसके परिणाम स्वरूप कई मारे गए और कई ने आत्मसमर्पण किया।
    • उन्होंने निर्भर गुर्जर समेत अन्य दस्यु गिरोहों को बेहद कमजोर कर दिया था। उनकी इस जंग को बाद में अन्य अधिकारियों व स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने आगे बढ़ाया और निर्भय गुर्जर, शिवकुमार पटेल उर्फ ददुआ व अंबिका पटेल उर्फ ठोकिया का खात्मा होता चला गया। पुलिस को उत्तर प्रदेश को दस्तु आतंक से मुक्त कराने में कामयाबी मिली।
    • चौधरी आईजी प्रयागराज रेंज व एडीजी प्रयागराज रेंज के अलावा ईओडब्ल्यू में भी तैनात रहे। चौधरी नौ सितंबर, 2015 से आठ मई, 2017 तक एडीजी कानून-व्यवस्था के महत्वपूर्ण पद पर भी तैनात रहे और यह कार्यकाल भी अपराधियों के प्रति उनकी सख्त नीति के लिए याद किया जाता है।

    ऑपरेशन सिंदूर से भी रहा संबंध

    केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के दौरान एडीजी आईटीबीपी व एडीजी सीआरपीएफ, जम्मू-कश्मीर जोन के पद पर भी रहे। अगस्त 2024 में उन्हें डीजी बीएसएफ बनाया गया था। बीएसएफ में उनका सेवाकाल ऑपरेशन सिंदूर में बल द्वारा निभाई गई उत्कृष्ट भूमिका के लिए भी याद किया जाएगा।

    इसके अलावा सीमा सुरक्षा बल अकादमी ग्वालियर (मध्य प्रदेश) में ड्रोन वारफेयर स्कूल की स्थापना, नक्सलरोधी अभियान के तहत छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ क्षेत्र में बीएसएफ की तैनाती के विस्तार, समूह बी व सी के सामान्य ड्यूटी (जीडी) कार्मिकों व जल स्कंध (वाटर विंग) संवर्ग के लिए कैडर समीक्षा समेत अन्य विशिष्ट कार्यों के लिए भी उनका कार्यकाल यादगार रहेगा।

    (लखनऊ से आलोक मिश्र के इनपुट के साथ)

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