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    साइबर सिक्योरिटी का छात्र ही निकला ठगों का सलाहकार, छत्तीसगढ़ में पुलिस का बड़ा खुलासा; चार गिरफ्तार

    Updated: Sat, 29 Nov 2025 11:51 PM (IST)

    छत्तीसगढ़ में पुलिस ने दो बड़े साइबर फ्रॉड का खुलासा किया है। इसमें ठगों ने डिजिटल अरेस्ट और फर्जी शेयर ट्रेडिंग के माध्यम से दो करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की। इन मामलों में शामिल एक आरोपित साइबर सिक्योरिटी का छात्र है, जो ठग गिरोह के सलाहकार की भूमिका में था। पुलिस ने तीन आरोपितों को मध्य प्रदेश और एक को गुरुग्राम से गिरफ्तार किया है।

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    साइबर सिक्योरिटी का छात्र ही निकला ठगों का सलाहकार, गिरफ्तार (सांकेतिक तस्वीर)

    जेएनएन, राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में पुलिस ने दो बड़े साइबर फ्रॉड का खुलासा किया है। इसमें ठगों ने डिजिटल अरेस्ट और फर्जी शेयर ट्रेडिंग के माध्यम से दो करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की।

    इन मामलों में शामिल एक आरोपित साइबर सिक्योरिटी का छात्र है, जो ठग गिरोह के सलाहकार की भूमिका में था। पुलिस ने तीन आरोपितों को मध्य प्रदेश और एक को गुरुग्राम से गिरफ्तार किया है, जबकि गिरोह का भारतीय सरगना अब भी फरार है।

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    सभी आरोपितों की आयु 20 से 25 वर्ष के बीच है। इन घटनाओं के तार कंबोडिया में स्थित ठगों से जुड़े हैं, जहां एक चीनी नेटवर्क इस अपराध को संचालित कर रहा है।

    साइबर अपराधियों ने राजनांदगांव की 79 वर्षीय शीला सुबाल को सीबीआई अधिकारी और जज बनकर वीडियो काल के माध्यम से डराया। उन्हें मनी लांड्रिंग केस में फंसाने की धमकी दी गई और कहा कि उन्हें खुद को निर्दोष साबित करने के लिए रकम जज के खाते में ट्रांसफर करनी होगी।

    भयभीत महिला ने ठगों द्वारा बताए गए विभिन्न खातों में कुल 79,69,047 रुपये ट्रांसफर कर दिए। एक अन्य मामले में ठगों ने खुद को फारेक्स/ट्रेडिंग विशेषज्ञ बताकर एक युवा व्यापारी को फर्जी आनलाइन ट्रेडिंग साइट का लिंक भेजा।

    पहले 15 हजार रुपये का छोटा मुनाफा देकर व्यापारी का विश्वास हासिल किया, फिर बड़े मुनाफे का लालच देकर कुल 1,21,53,590 रुपये निवेश के नाम पर जमा करवा लिए।

    ठगी की रकम को बाद में विभिन्न खातों से निकालकर गिरोह को भेजा गया। इस प्रक्रिया में मुख्य भूमिका निभाने वाला व्यक्ति राधेश्याम है, जिसे गुरुग्राम से गिरफ्तार किया गया है। जांच में पता चला है कि मध्यप्रदेश के सीहोर निवासी धीरज सिंह और अरविंद ठाकुर इस गिरोह को दो प्रतिशत कमीशन पर बैंक खाते उपलब्ध कराते थे।

    इंदौर निवासी डिंपल यादव ठगों का तकनीकी मददगार था। वह कंप्यूटर साइंस में बीटेक और साइबर सिक्योरिटी का कोर्स कर रहा है। इसके बदले ये लोग तीन प्रतिशत तक कमीशन लेते थे।