यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 07, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Cyber Crime: अच्छे खासे पढ़े-लिखे हो रहे साइबर ठगों का शिकार; ये पांच पेशेवर हो गए 'Digital Arrest'
शिक्षित व्यक्तियों को भी साइबर अपराध का शिकार होने का खतरा है। कई लोग अभी भी इस गलत धारणा के ...और पढ़ें

ऑनलाइन डेस्क, नई दिल्ली। देश में इन दिनों साइबर अपराध घटनाओं की लहर सी आ गई है। रोज सैकड़ों ऐसी खबरें आ रही हैं जिनमें लोग अपनी मेहनत की कमाई साइबर अपराधियों के हाथों गवां रहे हैं। ऐसा नहीं है कि अनपढ़ या कम पढ़े लिखे लोग ही अपनी कमाई गवां रहे हैं, अच्छे खासे पढ़े-लिखे लोग साइबर अपराधियों का शिकार बन रहे हैं। यानी कोई भी, चाहे उनकी शिक्षा या पेशा कुछ भी हो, डिजिटल धोखाधड़ी से सुरक्षित नहीं है।
नवंबर 2024 में, दिल्ली में एक रिटायर इंजीनियर साइबर ठगी का शिकार हो गया, उसको 10 करोड़ रुपये का चूना लग गया। एक इंजीनियर होने के बावजूद साइबर अपराधी शख्स को आठ घंटे डिजिटल अरेस्ट करने में कामयाब रहे और उन्होंने इस ठगी में जीवन भर की बचत खत्म कर दी। उनका परिवार, अच्छी तरह से शिक्षित है और विदेश में रह रहा था। लेकिन वह भी इस साइबर अपराध से बच न सके।

साइबर अपराधी उच्च शिक्षित और पेशेवर लोगों को भी निशाना बना रहे
इस घटना से अस्पष्ट है कि सबसे अधिक शिक्षित व्यक्तियों को भी साइबर अपराध का शिकार होने का खतरा है। कई लोग अभी भी इस गलत धारणा के तहत काम करते हैं कि साइबर घोटालेबाज मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में अशिक्षित या अनजान व्यक्तियों को निशाना बनाते हैं। साइबर अपराधी अब उच्च शिक्षित और पेशेवर लोगों को भी निशाना बना रहे हैं, उनके विश्वास और कमजोरियों का फायदा उठा रहे हैं।
केस 1: दिल्ली में सेवानिवृत्त इंजीनियर को 10 करोड़ रुपये का नुकसान
सेवानिवृत्त इंजीनियर की कहानी, जिसका नाम अज्ञात है, इस बात का एक डरावना उदाहरण है कि धोखेबाज अपने पीड़ितों को कैसे धोखा देते हैं। दिल्ली में रहने वाले इंजीनियर को विदेश से एक फोन कॉल आया, जिससे 10 करोड़ रुपये की ठगी हो गई। साइबर ठगों ने उसको कई घंटो तक डिजिटल अरेस्ट करके रखा और उसे बताया कि उसका कई क्राइम में नाम है। इसके बाद उनसे खुद ही अपनी हाथों से साइबर ठगों के खातों में पैसे ट्रांसफर कर दिए। यह महत्वपूर्ण है कि इंजीनियर न केवल अच्छी तरह से शिक्षित था, बल्कि तकनीकी क्षेत्रों में भी अनुभवी था, जिससे पता चलता है कि इस बढ़ते खतरे से कोई भी सुरक्षित नहीं है।
केस 2: गाजियाबाद में सॉफ्टवेयर इंजीनियर को 10 लाख रुपये का नुकसान
गाजियाबाद में एक और हालिया घटना में, गार्गी गुप्ता नामक एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर को साइबर अपराधियों द्वारा 24 घंटे के लिए "डिजिटल अरेस्ट" किया। इन जालसाजों ने खुद को कानून प्रवर्तन अधिकारी (ईडी और सीबीआई) के रूप में पेश किया, और उन पर कूरियर के माध्यम से कनाडा में ड्रग्स भेजने का झूठा आरोप लगाया। 24 घंटे की उनकी कड़ी मशक्कत के दौरान , अपराधियों ने उसके खाते से 10 लाख रुपये निकाल लिए। उसके अनुभव का सबसे डरावना हिस्सा यह है कि वह एक शिक्षित पेशेवर थी, फिर भी इस तरह के सुनियोजित घोटाले की चपेट आ गई। यह घटना 29 नवंबर में हुई थी।
केस 3: प्रयागराज में डॉक्टर को 50 लाख रुपये का नुकसान
साइबर अपराधी अपने पीड़ितों को केवल इंजीनियरों या सॉफ्टवेयर पेशेवरों तक ही सीमित नहीं रख रहे हैं। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में एक डॉक्टर साइबर ठगी का शिकार हो गया, जिससे उसे 50 लाख रुपये की चपत लग गई। जालसाजों ने उन्हें एक एपीके फाइल भेजी, जिससे उनके फंड की चोरी हो गई। चार दिसंबर को हुई यह घटना बताती है है कि एक पेशे से डॉक्टर जैसे उच्च प्रशिक्षित पेशेवर भी असुरक्षित हैं।
केस 4: गाजियाबाद में सेवानिवृत्त शिक्षक को 35 लाख रुपये का नुकसान
गाजियाबाद में आशा कपूर नाम की 67 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षिका साइबर ठगी का शिकार हो गईं। खुद को पुलिस अधिकारी बताकर जालसाजों ने शिक्षिका को "डिजिटली गिरफ्तार" किया, उन्हें धमकाया और अंततः उनके खाते से 35 लाख रुपये ट्रांसफर कर लिए। 20 नवंबर को हुई यह परेशान करने वाली घटना इस बात को रेखांकित करती है कि शिक्षक जैसे समाज के सबसे वरिष्ठ सदस्य भी, डिजिटल अपराधों का शिकार हो रहे हैं।
केस 5: मुंबई की महिला को 1.7 लाख रुपये का नुकसान
एक विशेष रूप से चौंकाने वाला मामला मुंबई में हुआ, जहां एक फार्मास्युटिकल कंपनी में काम करने वाली 26 वर्षीय महिला को "डिजिटल अरेस्ट" किया और 1.7 लाख रुपये ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया। जालसाज ठगी करते हुए इस भयानक स्तर तक पहुंच गए कि पीड़िता को कपड़े भी उतारने पड़े। जब तक उसे एहसास हुआ कि उसे धोखा दिया गया है, तब तक उसके खाते से पैसे निकाले जा चुके थे। 26 नवंबर को बोरीवली पूर्व में हुई यह घटना साइबर अपराधियों की चरम रणनीति को उजागर करती है अब अपने पीड़ितों का शोषण करने के लिए नियोजित कर रहे हैं।
साइबर धोखाधड़ी से खुद को कैसे बचाएं
साइबर अपराध बढ़ने के साथ, सतर्क रहना महत्वपूर्ण है। खुद को धोखाधड़ी का शिकार होने से बचाने के लिए यहां कुछ सरल उपाय इस प्रकार हैं...
- अज्ञात कॉल या संदेशों पर भरोसा न करें, यदि आपको किसी अपरिचित नंबर से कॉल या संदेश प्राप्त होता है, खासकर विदेश से, तो जवाब न दें।
- व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से बचें, कभी भी फोन या ऑनलाइन पर बैंक विवरण या पासवर्ड जैसी संवेदनशील जानकारी का खुलासा न करें।
- अपरिचित धमकियों से सावधान रहें, यदि कोई पुलिस अधिकारी या सरकारी अधिकारी होने का दावा करता है और आपको कानूनी परिणाम भुगतने की धमकी देता है या पैसे की मांग करता है, तो यह संभवतः एक घोटाला है। ऐसी घटनाओं की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
- अपने प्रियजनों को सूचित करें, अपने परिवार के सदस्यों को संभावित घोटालों और सावधान रहने वाले संकेतों के बारे में सूचित रखें।
- साइबर धोखाधड़ी में वृद्धि हर किसी के लिए खतरे की घंटी है, चाहे उनकी शिक्षा या पेशा कुछ भी हो। यदि उच्च शिक्षित और तकनीक-प्रेमी व्यक्ति भी इन घोटालों का शिकार हो सकते हैं, तो हम सभी के लिए सतर्क और सूचित रहना आवश्यक है।
