तेलंगाना, प्रेट्र। दुनियाभर में फिलहाल रूस अपनी कोरोना वैक्सीन को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा में है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मंगलवार को बताया कि उनके देश ने दुनिया की पहली कोरोना वैक्सीन को रजिस्टर करा लिया है। इस बीच, दुनियाभर के वैज्ञानिक रूसी वैक्सीन आने के बाद इस कदम को संदेह की दृष्टि से देख रहे हैं। सभी वैज्ञानिक टीके के तीसरे और अंतिम चरण के ट्रायल से पहले इसे रूस द्वारा रजिस्टर कराने के निर्णय पर सवाल उठा रहे हैं।

किसी भी टीके का तीसरे चरण का परीक्षण आम तौर पर हजारों लोगों पर महीनों तक चलता है, लेकिन रूस ने तीसरे चरण के खत्म होने से पहले ही इस वैक्सीन को रजिस्टर करा लिया है। जो वैक्सीन पर कई तरह से सवालिया निशान लगाता है। 

इस बीच, भारत में सीएसआइआर के एक वैज्ञानिक ने भी रूसी वैक्सीन पर सवाल उठाए हैं। CSIR के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा है कि रूस की कोरोना वैक्सीन को तीसरे और अंतिम चरण के ट्रायल से पहले ही रजिस्टर करा लिया गया है, जो इस टीके की प्रभावकारिता और सुरक्षा पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि इस वैक्सीन को लेकर पर्याप्त आंकड़े सामने नहीं आए हैं, जिससे वैक्सीन का कोरोना मरीजों के इलाज के लिए प्रभावकारिता और सुरक्षा स्तर देखा जा सके। 

सेलुलर और आणविक जीव विज्ञान(CCMB) के निदेशक राकेश के मिश्रा ने कहा कि अगर लोग भाग्यशाली रहे तो ये वैक्सीन काम करेगी। उन्होंने कहा कि कोरोना के इस टीके की प्रभावकारिता और सुरक्षा दोनों को लेकर कोई जानकारी नहीं है। रूस ने इस वैक्सीन का उचित परीक्षण नहीं किया है, उन्होंने तीसरे चरण का ट्रायल भी नहीं किया है। उन्होंने कहा कि कोई भी टीका कितना प्रभावशाली है, इसका पता करने के लिए टीके का बड़ी संख्या में लोगों पर परीक्षण किया जाता है और इसके बाद करीह 2 महीने तक इंतजार करना चाहिए कि यह देखने के लिए कि क्या उन्हें वायरल संक्रमण है या नहीं। 

इंडियन टी20 लीग

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस