डा. अनिल सेठी। पहले जिस तरह हमारे बुजुर्ग शिक्षक दिवस, गणतंत्र दिवस या स्वतंत्रता दिवस से जुड़े बहुत से किस्से-कहानियां हमें सुनाया करते थे। जिस तरह से वीरता की, आजादी की और युद्ध की कहानियां सुनकर हम पले-बढ़े, वैसा आज की नई पीढ़ी में नहीं देखने को मिलता। एक तरह से आज के दौर में बच्‍चों को यह सब कहानियां सुनाने का प्रचलन खत्‍म सा हो गया है। हम लोग जब भी कहीं भी कोई कमी देखते हैं, तो बस सरकार की जिम्‍मेदारी समझकर अपना पल्‍ला झाड़ लेते हैं।

मेरा मानना है कि या तो आप समाधान का हिस्सा हैं या आप ही समस्या हैं। जबकि हमें यह समझना चाहिए कि सिर्फ सरकार के भरोसे बैठे रहने से कुछ नहीं होगा। हम सबको दो चार दिनों के देशप्रेम के बजाय चौबीसों घंटे देशप्रेम की अहमियत को समझना होगा। हमें लगता है हम यह भूल चुके है कि देश प्रेम क्या होता है। अगर हम 130 करोड़ भारतवासी ठान लें, तो क्‍या नहीं कर सकते, कौन सा लक्ष्‍य नहीं प्राप्‍त कर सकते। लेकिन इसके लिए सबसे पहले हमें अपनी मानसिकता पर विजय प्राप्‍त करनी होगी।

बदलें अपनी मानसिकता : मानसिकता बदलने के यहां कई आशय हैं। सबसे पहले तो हमें यह देखना होगा कि क्‍या हम सचमुच देश से प्रेम करते हैं? अगर इसका जवाब हां है, तो हम जहां हैं, जिस परिस्थिति में हैं, वहीं से देश की सेवा कर सकते हैं। देश सेवा के लिए सेना में भर्ती होना जरूरी नहीं है। सरकारी नौकरी या किसी पद की भी आवश्‍यकता नहीं है। उदाहरण के लिए, यदि हम मध्यमवर्गीय परिवार से हैं तो अपने घर में काम करने वाली बाई के बच्‍चों की पढ़ाई का जिम्मा ले लें, तो यह बहुत बड़ी देश सेवा होगी। क्योंकि वे बच्‍चे पढ़ लिख कर अच्छे नागरिक बनेंगे और देश की अर्थव्यवस्था में सहयोग करेंगे।

उदाहरण के लिए हमारी सोसाइटी ने ऐसा ही एक निर्णय ले रखा है और सभी घरेलू सहयोगी, ड्राइवर आदि को कोरोना टीके की दोनों खुराक लगवाने की जिम्मेदारी सोसाइटी के मेंबर्स निभा रहे हैं। इसी तरह, अगर हम पढ़ाई पूरी कर चुके हैं या पूरी करने वाले हैं, तो हमको जाब ढूंढ़ने के बजाय कोई नया आइडिया सोचना चाहिए। एंटरप्रेन्‍योर के तौर पर कोई नया बिजनेस शुरू करके लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने चाहिए। कुल मिलाकर हम जिस परिस्थिति में हैं, उसी में अपना देशप्रेम दिखा सकते हैं। इस तरह अगर हम देश की प्रगति में कुछ भी योगदान करते हैं, वह आने वाली पीढ़ी के नौजवानों को भी सबक देगा और उन्‍हें प्रेरित भी करेगा।

सरकार की ओर से भी ऐसे युवाओं को लगातार प्रोत्‍साहित किया जा रहा है। इसी तरह अगर आप कुछ भी नया करना चाहते हैं, तो पूरी ईमानदारी, लगन और मेहनत से उसे कीजिये, आपको सफलता जरूर मिलेगी। यदि सफलता नहीं भी मिलती है, तो आपको जो अनुभव होगा, वह आगे की सफलता की नींव बनेगा।

Edited By: Sanjay Pokhriyal