सहकारी समितियों में गड़बड़ी पर लगाम, सरकार ने ऑडिट नियम कड़े किए; अब बताना होगा- किसे, कितना कर्ज दिया
सहकारिता मंत्रालय ने बहु-राज्यीय सहकारी समितियों के लिए नए, सख्त ऑडिट नियम अनिवार्य किए हैं। इसका उद्देश्य वित्तीय अनुशासन बढ़ाना, गड़बड़ियों का पता लगाना और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।

सहकारी समितियों में गड़बड़ी पर लगाम।
HighLights
बहु-राज्यीय सहकारी समितियों के लिए नए सख्त ऑडिट नियम अनिवार्य।
ऑडिटर अब कर्ज देने और नियमों के पालन की जांच करेंगे।
वित्तीय अनुशासन, जवाबदेही बढ़ाने और गड़बड़ी रोकने का लक्ष्य।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। बहु-राज्यीय सहकारी समितियों के खातों और कामकाज की जांच अब ज्यादा सख्ती से होगी। सहकारिता मंत्रालय ने इसके लिए लेखापरीक्षा की नई व्यवस्था को अनिवार्य कर दिया है।
इसके तहत ऑडिटर को सिर्फ आय-व्यय का हिसाब ही नहीं देना होगा, बल्कि यह भी बताना होगा कि समिति ने कर्ज देने, पैसे के इस्तेमाल के साथ प्रबंधन में नियमों का पालन किया है या नहीं। इसका उद्देश्य आर्थिक गड़बड़ियों का समय रहते पता लगाकर समितियों में वित्तीय अनुशासन और जवाबदेही बढ़ाना है।
सहकारिता मंत्रालय ने बुधवार को बहु-राज्य सहकारी सोसाइटी (लेखापरीक्षक की रिपोर्ट) की जानकारी दी। नई व्यवस्था को विभिन्न चरणों में लागू किया जाएगा। पहले एक हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की हैसियत वाली समितियों और फिर 50 करोड़ रुपये से अधिक की समितियों को शामिल किया जाएगा।
इससे छोटी समितियों को नए नियमों के अनुसार अपनी व्यवस्था तैयार करने का समय मिलेगा। नई व्यवस्था के तहत संबंधित समितियों की ऑडिट रिपोर्ट तय प्रारूप में तैयार होगी। ऑडिटर को महत्वपूर्ण प्रश्नों के जवाब देने होंगे। कमी मिलने पर उसका कारण बताना होगा। इससे अलग-अलग समितियों की रिपोर्ट को समझना और उनकी तुलना करना आसान होगा।
कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए ऑडिट में समिति के प्रबंधन एवं फैसले लेने के तरीके पर भी ध्यान दिया जाएगा। इसमें निदेशक मंडल के गठन, बैठकों, आम सभा एवं जरूरी कामकाज की जांच भी होगी। नियमों के अनुरूप काम हो रहा है या नहीं साथ ही संबंधित पक्षों से लेन-देन में नियमों का पालन हो रहा है या नहीं, यह भी देखा जाएगा।
इसका हिसाब भी होगा कि समिति ने किसे कितना कर्ज दिया। उसकी वसूली हो रही है या नहीं। कोई अन्य परेशानी तो नहीं आ रही। जमाराशि, उधारी और समय पर पैसे नहीं लौटाने से जुड़े मामलों की भी जानकारी देनी होगी, ताकि किसी समिति की माली हालत बिगड़ने के शुरुआती संकेत मिल सकें। अगर कर्ज की वसूली लगातार घट रही है या भुगतान में देरी हो रही है तो समय रहते इसकी रिपोर्ट सामने आ सकती है।
नई व्यवस्था का बड़ा फायदा यह होगा कि केंद्रीय सहकारी समितियों के पंजीयक (सीआरसीएस) को उन समितियों की पहचान करने में आसानी होगी, जिनमें वित्तीय या प्रशासनिक जोखिम ज्यादा है। ऐसी समितियों के निरीक्षण और जांच को प्राथमिकता दी जा सकेगी।
ऑडिट रिपोर्ट को सीआरसीएस पोर्टल से जोड़ने की भी तैयारी है, ताकि आंकड़ों की जांच, जोखिम का आकलन और नियमों के पालन में कमी की पहचान आसानी से हो सके। जहां लागू होगा, वहां साइबर सुरक्षा और धन शोधन रोकने से जुड़े नियमों की जांच भी की जाएगी।
