नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। कोरोना से लड़ाई में मदद के लिए दुनिया के कई देशों से भारत में राहत सामग्री को जल्द से जल्द जरूरतमंदों तक पहुंचाने का काम शुरू हो गया है। फिलहाल कोरोना से अधिक संक्रमित राज्यों को वितरण में प्राथमिकता दी जा रही है। सरकार के मुताबिक गत दो मई तक 24 श्रेणी के 40 लाख आइटम विभिन्न राज्यों की 89 संस्थाओं में वितरित किए जा चुके हैं। इनमें बाईपैप मशीन, आक्सीजन कंसंट्रेटर्स, आक्सीजन सिलेंडर, पीएसए आक्सीजन प्लांट्स, पल्स आक्सीमीटर, रेमडेसिविर, फेबिफ्लू, एन-95 मास्क व पीपीई किट जैसे आइटम शामिल हैं। 

दो मई तक 24 श्रेणी के 40 लाख आइटम विभिन्न राज्यों की 86 संस्थाओं को मिले

राहत सामग्री के वितरण के लिए स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन एक सेल का गठन किया गया है जो विदेश से आने वाली सभी प्रकार की सामग्री को रिसीव करने का काम करता है और जरूरत के हिसाब से उसके वितरण करता है। इस सेल ने गत 26 अप्रैल से अपना काम करना शुरू कर दिया है। इस सेल में शिक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, नागरिक उड्डयन मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। 

हर रोज सुबह 9.30 बजे इस सेल की बैठक होती है जिसमें सभी प्रकार के लंबित काम निपटाए जाते हैं। सेल के काम व सामग्री व उसके वितरण की देखरेख के लिए नीति आयोग के सीईओ के नेतृत्व में एक कमेटी का गठन किया गया है। इस कमेटी में व्यय विभाग के सचिव, विदेश मंत्रालय व स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।विदेश से आने वाली राहत सामग्री के समन्वय के लिए विदेश मंत्रालय नोडल एजेंसी का काम कर रहा है। 

सरकार का दावा है कि इस राहत सामग्री को खोलने उसे फिर से पैक करने और जरूरतमंद राज्य तक भेजने का काम कम से कम समय में किया जा रहा है। सामग्री का आवंटन करते वक्त राज्यों की स्वास्थ्य सुविधा और वहां संक्रमण की स्थिति को ध्यान में रखा जाता है। एम्स, केंद्रीय अस्पताल व डीआरडीओ के माध्यम से इस राहत सामग्री को राज्यों तक पहुंचाने का काम किया जा रहा है। सामान के वितरण में इस बात का भी ध्यान रखा जा रहा कि किन जगहों पर इलाज के लिए संक्रमित अधिक आ रहे हैं। अप्रैल के आखिरी सप्ताह से विदेश से कोरोना राहत संबंधी आइटम भेजे जाने की गति तेज हो गई है।

 

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