नई दिल्ली [जागरण संवाददाता]। देश भर को हिलाकर रख देने वाले दिल्ली गैंगरेप मामले में शनिवार को पहला फैसला बाल न्यायालय द्वारा सुना दिया गया। बाल न्यायालय की मजिस्ट्रेट गीतांजलि गोयल ने नाबालिग को गैंगरेप और हत्या के मामले में दोषी करार देते हुए तीन साल कैद की सजा सुनाई है। हालांकि उसे पीड़िता के मित्र की हत्या के प्रयास के आरोप से बरी कर दिया गया। गैंगरेप की घटना से पूर्व बस में चढ़े कारपेंटर रामाधार से हुई लूटपाट के मामले में नाबालिग के अब तक जेल में रहने की अवधि [आठ माह] को पर्याप्त सजा मान लिया गया।

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इस तरह उसे बाल सुधार गृह में दो साल चार महीने ही बिताने होंगे। इस फैसले पर पीड़िता के परिजनों और साथ आम लोगों ने गहरी नाराजगी जताई। कुछ लोगों ने अदालत के बाहर नारेबाजी करते हुए दुष्कर्मी को फांसी देने की मांगी की।

बाल न्यायालय द्वारा फैसला सुनाने के बाद नाबालिग को बाल सुधार गृह में भेज दिया गया। फैसले के बाद अदालत से बाहर निकले पीड़िता के परिजन बेहद निराश दिखे। उनके मुताबिक, एक जघन्यतम अपराध के लिए दी गई यह सजा बहुत कम है। पीड़िता के परिजनों एवं स्वयंसेवी संगठनों के लोगों ने अदालत के बाहर नारेबाजी कर दुष्कर्मी को फांसी देने की मांग की।

उल्लेखनीय है कि 16 दिसंबर, 2012 को वसंत विहार इलाके में चलती बस में पैरामेडिकल छात्रा से गैंगरेप किया गया था। दुष्कर्म के बाद आरोपियों ने पीड़िता व उसके मित्र पर जानलेवा हमला कर उन्हें महिपालपुर फ्लाईओवर के पास फेंक दिया था। बाद में पीड़िता की सिंगापुर के अस्पताल में मौत हो गई थी। इस मामले में पुलिस ने नाबालिग के अलावा बस चालक राम सिंह, उसके भाई मुकेश, विनय शर्मा, पवन गुप्ता, अक्षय ठाकुर को गिरफ्तार किया था। राम सिंह ने 11 मार्च को तिहाड़ जेल में फांसी लगा ली थी। आरोपी मुकेश, विनय, अक्षय और पवन का मामला साकेत कोर्ट में विचाराधीन है।

पुलिस ने नाबालिग आरोपी को 21 दिसंबर 2012 को गिरफ्तार किया था। उस समय उसकी उम्र 17 साल छह महीने 11 दिन थी। जबकि चार जून के बाद उसकी उम्र 18 साल हो चुकी है। पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि नाबालिग ने आवाज देकर पीड़िता को बस में बैठाया था। नाबालिग ने ही पीड़िता के साथ सबसे अधिक दरिंदगी दिखाई थी। पीड़िता की आंत निकालने का आरोप भी नाबालिग पर ही था।

पीड़िता के भाई ने की थप्पड़ मारने की कोशिश

दिल्ली दुष्कर्म कांड के नाबालिग आरोपी को बाल न्यायालय से सजा मिलने के बाद पीड़िता के छोटे भाई ने उसे थप्पड़ मारने की। जिस वक्त अदालत में फैसला सुनाया जा रहा था, पीड़िता के भाई नाबालिग आरोपी पर झपटा लेकिन वहां पर मौजूद लोगों ने उसे पकड़ लिया। नाबालिग दुष्कर्मी को मिली तीन साल की सजा पर पीड़िता के भाई ने नाराजगी जताई। आंख में आंसू भरे हुए उसने कहा, जिस तरह का अपराध उसने किया था, उसके हिसाब से यह सजा बहुत कम है। यह न्याय नहीं है। उसे बस फांसी की सजा मिलनी चाहिए।

'बस तीन साल? तीन साल सजा देने से बेहतर है कि वे उसे छोड़ दें। हमें मूर्ख बनाया गया है। यह स्वीकार्य नहीं है। हम इस फैसले से सहमत नहीं हैं। इससे यह संदेश जाएगा कि क्रूरतम कृत्य करके भी नाबालिग बच सकते हैं।'

-पीड़िता की मां

ट्वीट:

सजा जुर्म को देखते हुए होनी चाहिए, न कि अपराधी की उम्र के हिसाब से। ऐसे फैसले नाबालिगों को अपराध के लिए उत्साहित ही करेंगे।

-प्रिटी जिंटा

इस पर यकीन करना कठिन है कि सारे बदमाश नाबालिग तीन साल की ही सजा पाते हैं और 72 साल के आसाराम पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। एक कुछ छोटा है और दूसरा कुछ बूढ़ा। शर्म की बात है।

अमीशा पटेल

बलात्कारी तीन साल के लिए सुधारघर जाएगा। मैं नहीं कहता कि उसे फांसी दे दो, लेकिन तीन साल की सजा और वह भी सुधारगृह में? मेरा भारत कहां?

-सिद्धार्थ

आसाराम के बेटे का नया बयान आया है कि आसाराम बापू तो नाबालिग हैं।

फेकिंग न्यूज

मेरा दिमाग हत्या- दुष्कर्म के दोषी नाबालिग को तीन साल की सजा के औचित्य को समझ रहा है, लेकिन मेरा दिल नहीं। कानून को दिल-दिमाग को संतुष्ट करने वाला होना चाहिए।

-सोनिया सिंह

अगर कोई लड़का इतना बड़ा है कि दुष्कर्म कर सकता है तो वह फांसी पर लटकाने लायक भी हो सकता है।

-आरए कृष्णा

फेसबुक पर एक लड़की का साधारण और तार्किक सवाल है कि मैं समझ नहीं पा रही हूं कि बलात्कार के मामले में नाबालिग का क्या चक्कर है?

-रोफी इंडियन

'यह न्याय नहीं है। कानून को बदलने की जरूरत है। हम चाहते हैं कि उसे फांसी हो। हमारे साथ गंदा खेल खेला जा रहा है। हम ऊपरी अदालत में अपील करेंगे। इस देश में लड़की बनकर पैदा होना अपराध है।'

-पीडि़ता के पिता

आपकी राय

क्या आप जघन्य अपराध करने वाले इस नाबालिग को मिली तीन साल की सजा को पर्याप्त मानते हैं?

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