नई दिल्ली, अनुराग मिश्र। दुनिया भर में कोरोना को मात देने के लिए तमाम तरह के अविष्कार और खोज जारी हैं। कोरोना के वैक्सीन के साथ ही इसके नए लक्षणों पर भी काम हो रहा है। इसी क्रम में आईआईटी गोवा ने छींक या कफ के नुकसान के गणित को खोज निकाला है। इसकी मदद से अब यह सुनिश्चित करना संभव होगा कि किसी व्यक्ति के खांसने या छींकने पर हवा में छींक या कफ के कण किस तरह और कहां तक जाते हैं।

आईआईटी गोवा के वैज्ञानिकों ने बताया कि सोशल डिस्टैंसिंग कोरोना से बचाव का सबसे प्राथमिक और मुख्य उपाय है। ऐसे में कोरोना प्रभावित किसी व्यक्ति द्वारा छींकने या कफ द्वारा कितना नुकसान होता है, इसका आकलन करना जरूरी है। हालांकि, सोशल डिस्टैंसिंग कितनी होनी चाहिए, यह फिजिकल और पर्यावरणीय फैक्टर्स पर काफी हद तक निर्भर करती है।

उन्होंने बताया कि आईआईटी गोवा गणितीय आकलन कर यह समझने में लगा है कि ह्यूमन एक्शन जैसे- छींकने, खांसने, थूकने आदि से वायरस कैसे फैलता है? छींकने, खांसने, थूकने या बात करने से उत्पन्न होने वाले हजारों ड्रॉपलेट्स वातावरण में वायरस और बैक्टीरिया फैलाते हैं।

इस गणितीय गुत्थी को आईआईटी गोवा के फिजिक्स के प्रोफेसर डॉ एस. के दास सुलझाने में लगे हैं। उन्होंने बताया कि इस पूरी प्रक्रिया को समझने के लिए फिजिक्स की एप्रोच का सहारा लिया गया है। छींकने या खांसने पर हवा में ड्रॉपलेट्स के मोशन को समझने के लिए फिजिक्स के नियमों को आधार माना गया है। उन्होंने पाया कि गुरुत्वाकर्षण बल की वजह से खांसने या छींकने से उत्पन्न ड्रॉपलेट्स लंबे समय तक हवा में नहीं रह पाते, जबकि छोटे ड्रॉपलेट्स (करीब 2.5 माइक्रोमीटर) वाले ड्रॉपलेट्स लंबे समय तक हवा में रहते हैं।

इसका निष्कर्ष यह निकालता है कि एक स्वस्थ व्यक्ति को कोरोना प्रभावित व्यक्ति से अधिकतम दूरी स्थापित करनी चाहिए। सोशल डिस्टैंसिंग के साथ-साथ उसे नाक और मुंह को भी समुचित तरीके से कवर करना चाहिए।

आईआईटी गोवा के डाइरेक्टर प्रोफेसर बी. के मिश्रा ने बताया कि मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग इस बात का आकलन करने में लगा है कि ड्रॉपलेट्स की भेदन क्षमता और उ़सके फैलने का व्यवहार कैसा है। इसके अलावा, हाईस्पीड कैमरे के द्वारा भी इस बात का पता किया जा रहा है कि छींकने या खांसने के बाद वातावरण में ड्रॉपलेट्स का संचरण कैसे होता है। प्रोफेसर बी. के मिश्रा ने कहा कि इन सभी गणनाओं और एप्रोच के द्वारा हम वायरस से बचने के और उपाय भी तलाश सकेंगे।

कंटेनमेंट बॉक्स बचाएगा छींक से

इसी क्रम में आईआईटी रोपड़ के वैज्ञानिकों और दयानंद मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल- लुधियाना के डॉक्टरों ने मिलकर ऐसा अविष्कार किया है, जो स्वास्थ्यकर्मियों और डॉक्टरों को सुरक्षा का अतिरिक्त लेयर प्रदान करेगा, ताकि कोरोना के इंफेक्शन से उनका बचाव हो सके। आईआईटी रोपड़ के प्रोफेसर आशीष साहनी ने बताया कि हमने 'कंटेनमेंट बॉक्स' का निर्माण किया है। इससे कई बार रोगी के निकट संपर्क, खांसने या छींकने के दौरान इंफेक्शन की संभावना बढ़ जाती है। इस बॉक्स को रोगी के मुंह पर रखना होता है। रोगी को लिटाने के दौरान वेंटिलेटर का पाइप मुंह में डालने के दौरान और ऑपरेशन के दौरान इस बॉक्स को मुंह में रखा जा सकता है। 

Posted By: Vineet Sharan

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