नई दिल्‍ली, जेएनएन। Coronavirus News Update दुनियाभर में कोरोना की दूसरी और तीसरी लहर की चिंताओं के बीच देश में पिछले कुछ सप्ताह के दौरान संक्रमण और इससे होने वाली मौतों के आंकड़ों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। यही नहीं देश में सक्रिय और दैनिक मामलों में भी तेजी से कमी आई है।

पांच हफ्ते से गिर रहे औसत दैनिक मामले : देश में दैनिक संक्रमण के मामले जो 97 हजार तक पहुंच चुके थे, उनमें उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। अब रोजाना आने वाले मामले 80 हजार से कम हो चुके हैं। पिछले पांच सप्ताह से इनमें गिरावट दर्ज की जा रही है।

चरम पर पहुंचकर घटने लगे सक्रिय मामले : 18 सितंबर को सक्रिय मामले सर्वाधिक 10.17 लाख रिकॉर्ड किए गए। इसके बाद से लगातार मामलों में गिरावट आ रही है। करीब दो लाख कम होकर सक्रिय मामले 7.98 लाख हो चुके हैं। यही नहीं मामलों के दोगुना होने की अवधि भी बढ़ गई है। अगस्त मध्य में मामले 25.5 दिन में दोगुना हो रहे थे, वहीं अब यह अवधि 72.8 दिन हो गई है।

दैनिक मौतें भी हो रही हैं कम : एक अक्टूबर को देश में 24 घंटे में कोविड-19 से 1,181 लोगों की मौत के आंकड़े सामने आए थे। हालांकि, तीन अक्टूबर के बाद मौतों के मामले एक हजार से भी कम आ रहे हैं। 11 अक्टूबर के बाद से तो मौतों के दैनिक आंकड़े 900 से भी कम हो चुके हैं।

सर्वाधिक प्रभावित राज्यों का हाल : महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु जैसे बड़े और सर्वाधिक कोरोना प्रभावित राज्यों में भी मामलों में कमी आई है। हालांकि केरल जैसे राज्यों में जहां मामले एक वक्त बहुत कम हो गए थे, वहां फिर से तेजी आ गई है। इसलिए यहां अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।

लापरवाही पड़ सकती है भारी : महामारी विशेषज्ञों का मानना है कि हमें लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए अन्यथा यह कोरोना की दूसरी लहर का कारण बन सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि त्योहारी सीजन, स्कूल-कॉलेज खुलने, सर्दी और प्रदूषण के चलते इसकी दूसरी लहर आ सकती है।

दिल्ली में फिर बढ़ रहे मामले : कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के साथ दिल्ली एक बार फिर सर्वाधिक प्रभावित शहरों की सूची में पहले स्थान पर पहुंच चुका है। गुरुवार को दिल्ली में करीब 3,500 नए मामले सामने आए थे और इसके साथ ही कुल संख्या 3.21 लाख हो गई थी। पुणे पिछले करीब डेढ़ महीने से सर्वाधिक प्रभावित शहरों की सूची में पहले स्थान पर बना हुआ था। अगस्त और सितंबर की शुरुआत में यहां पांच हजार मामले रोजाना सामने आ रहे थे, जबकि अब घटकर 1,500 हो चुके हैं। वहीं बेंगलुरु में भी मामले तेजी से बढ़े हैं।

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