नई दिल्‍ली, जेएनएन। कोरोना संक्रमण की दस्तक के साथ ही ठीक एक साल पहले देश में लॉकडाउन लगाया गया था। इसने कोरोना संक्रमण को रोकने में बड़ी भूमिका निभाई, लेकिन देश की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा। अब फिर कोरोना संक्रमण तेजी से फैलने लगा है। ऐसे में लोग लॉकडाउन को लेकर चर्चा करने लगे हैं। इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म लोकल सर्कल ने लॉकडाउन के मुद्दे पर एक सर्वे किया, जिसमें पांच में से छह लोगों ने कोरोना को रोकने के लिए प्रतिबंध लगाए जाने का तो समर्थन किया, लेकिन लॉकडाउन पर असहमति जताई।

जिन जिलों में कोरोना के सक्रिय मामले 500 से ज्यादा हैं, उनमें तीन सप्ताह तक लॉकडाउन (आवश्यक फैक्ट्रियों व सेवाओं को छोड़कर) के खिलाफ क्यों हैं?

तीन सप्ताह लंबे लॉकडाउन के मुद्दे पर छह में से पांच लोगों ने जताई असहमति।

68% लोगों ने कहा कि जिन जिलों में सप्ताह दर सप्ताह सक्रिय मामले पांच हजार से ज्यादा रहें वहां प्रतिबंध लगाए जाएं।

70% ने होली के दौरान लॉकडाउन (राष्ट्रव्यापी अथवा स्थानीय) लगाने का समर्थन किया, ताकि कोरोना संक्रमण के प्रसार को रोका जा सके।

85%उन जिलों में भी प्रतिबंध लगाने की राय दी, जिनमें सप्ताह दर सप्ताह कोरोना के सक्रिय मामले 500- 5000 के बीच हों।

72% लोगों ने कहा कि उन जिलों में भी प्रतिबंध लगाएं, जिनमें कोरोना तेजी फैल रहा है और सक्रिय मामले 500-5000 के बीच बने हुए हैं।

भारत में 40 दिनों के भीतर कोरोना संक्रमण के मामले तीन गुना हो गए हैं। जिन जिलों में 5000 से ज्यादा कोरोना के सक्रिय मामले हैं, उनमें इसके प्रसार को रोकने के लिए क्या किया जाना चाहिए?

ऐसे किया गया सर्वे: देश के 304 जिलों से 35 हजार से ज्यादा प्रतिक्रियाएं आईं। इनमें 34 फीसद महिलाएं व 66 प्रतिशत पुरुष थे। प्रतिक्रिया देने वाले 48 फीसद लोग टियर एक, 31 फीसद टियर दो व 31 फीसद टियर तीन, चार व ग्रामीण जिलों से थे।

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