जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। कोरोना महामारी की मार से बुरी तरह से प्रभावित दक्षिण एशिया के छोटे देशों में बुधवार को आशा व उत्साह की नई लहर दौड़ गई। वजह यह है कि इस महामारी के खिलाफ भारत में निर्मित वैक्सीन की खेप इन देशों में पहुंच गई है। भारत ने बुधवार को ही कोविशील्ड की 1.50 लाख डोज भूटान और एक लाख डोज मालदीव भेजी थी। 21 जनवरी को बांग्लादेश को कोविशील्ड की 20 लाख डोज और नेपाल को 10 लाख डोज भेजी जाएगी। इसके बाद जल्द ही श्रीलंका, मारीशस और अफगानिस्तान को भी वैक्सीन की सप्लाई की जाएगी, इन देशों में नियामक मंजूरी मिलने का इंतजार किया जा रहा है। इन सभी देशों के बीच जब चीन की तरफ से अपनी पैठ बनाने की कोशिश हो रही है, ऐसे में भारत की यह वैक्सीन डिप्लोमेसी क्षेत्रीय कूटनीति में एक बड़ा गेम चेंजर बन सकती है। यह सारी मदद मुफ्त दी जा रही है।

भारत की 'पड़ोसी पहले' की नीति: भूटान और मालदीव को वैक्सीन उपलब्ध कराई

भारत ने 'पड़ोसी पहले' की अपनी नीति को आगे बढ़ाते हुए सबसे पहले भूटान और मालदीव को वैक्सीन उपलब्ध कराई है। दो दिनों भीतर पड़ोसी देशों को 32.50 लाख वैक्सीन देने के भारत के फैसले की दुनिया भर में प्रशंसा हो रही है। साथ ही इन देशों के भीतर भी भारत की छवि पहले से और मजबूत हुई है।

मालदीव के राष्ट्रपति ने वैक्सीन देने के लिए भारत का जताया आभार

इस बात की मिसाल इस बात से भी मिलती है कि भारतीय वैक्सीन के मालदीव पहुंचने पर खुद राष्ट्रपति इब्राहिम सोलिह ने विशेष प्रेस कांफ्रेंस की। उन्होंने वैक्सीन देने के लिए भारत का आभार तो जताया ही अपने देशवासियों से भी कहा कि यह उत्सव मनाने का अवसर है। भारत से मिले वैक्सीन से मालदीव की कुल पांच लाख आबादी के एक बड़े हिस्से को कोरोना से सुरक्षित किया जा सकेगा। पूरी तरह से पर्यटन पर निर्भर मालदीव के लिए अब हालात सामान्य करना आसान हो जाएगा।

पीएम शेरिंग ने कहा- भारतीय वैक्सीन भूटान के लोगों के लिए अमूल्य उपहार

इसी तरह से भूटान ने भारतीय वैक्सीन के आगमन पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया, जहां पीएम लोतेय शेरिंग व कैबिनेट के दूसरे सहयोगी उपस्थित थे। पीएम शेरिंग ने पीएम नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता का धन्यवाद किया। उन्होंने कोरोना वैक्सीन को भूटान के लोगों के लिए भारत की तरफ से अमूल्य उपहार करार दिया।

पड़ोसियों को भरोसेमंद मित्र का भरोसा दिलाया

विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि भारत सभी पड़ोसी देशों को यह भरोसा दिलाने में सफल रहा है कि वह हर मुश्किल वक्त में उनके साथ है और हर संभव मदद मुहैया कराएगा। मार्च, 2020 में कोरोना की शुरुआत से भारत ने इन दोनों छोटे, लेकिन रणनीतिक नजरिये से बेहद महत्वपूर्ण देशों को लगातार मदद की है। चाहे विदेश में फंसे इनके नागरिकों को स्वदेश लाने की बात हो या इन्हें चिकित्सा सामग्री पहुंचाने की , भारत ने कोई कसर नहीं छोड़ी है। अभी दोनों देशों को भारत ने अपनी तरफ से वैक्सीन दिए हैं, आगे जरूरत पड़ने पर ये खरीद भी सकते हैं या इनकी तरफ से अतिरिक्त वैक्सीन मांगी गई तो भारत उस पर भी विचार करेगा।

पड़ोसियों को भारत पर भरोसा

जानकार बताते हैं कि पाकिस्तान को छोड़ कर सभी पड़ोसी देशों को भारत ने संकेत दे दिया है कि वो अपने यहां वैक्सीन कार्यक्रम की शुरुआत करें। इन देशों में इस बात का एहसास है कि जब ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देश कोरोना वैक्सीन को लेकर कोई दरियादिली नहीं दिखा रहे हैं तब भारत अपनी जरूरत को पूरा करने के साथ ही दूसरे देशों को भी वैक्सीन दे रहा है। नेपाल के स्वास्थ्य मंत्री ने बुधवार को प्रेस कांफ्रेंस करके भारतीय वैक्सीन पर आधारित वैक्सीन कार्यक्रम चलाने का एलान किया।

भारत कई देशों को भेजेगा कोरोना वैक्सीन

विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को कहा था कि भारत भूटान, मालदीव, नेपाल, सेशेल्स, म्यांमार, बांग्लादेश को 20 जनवरी से वैक्सीन की आपूर्ति शुरू कर देगा। जबकि श्रीलंका, अफगानिस्तान और मारीशस से आवश्यक नियामक मंजूरी मिलने के बाद उन्हें वैक्सीन भेजी जाएगी।

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