नई दिल्ली, एएनआइ। यह कहा जाता है कि कठिनाई लोगों और राष्ट्रों को करीब ले आती है। ऐसे में घातक कोरोना वायरस ने भारत और कनाडा सहयोग को अप्रत्याशित रूप से बढ़ाया है। हाल ही में कनाडाई नागरिकों को घर वापस भेजने के लिए भारत ने 4 मई को 20वीं विशेष उड़ान को रवाना किया। इसके अलावा फार्मास्यूटिकल्स के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल भारत ने कनाडा को कोरोना से लड़ने के लिए हाइड्रोक्सी क्लोरोक्विन की 50 लाख टेबलेट दी। इस बीच कनाडा ने 70,000 से अधिक भारतीय छात्रों की देखभाल की, जो शैक्षणिक संस्थानों के बंद होने से संकट में फंस गए थे।

उच्चायुक्त अजय बिसारिया कहते हैं कि भारतीय मूल के लोगों (पीआईओ) द्वारा चलाए जा रहे कई मंदिरों, गुरुद्वारों, गैर-सरकारी संगठनों और सांस्कृतिक संगठनों ने यहां फंसे भारतीय छात्रों और अन्य भारतीयों को भोजन, आश्रय, दवाइयां आदि प्रदान की हैं। प्रवासी भारतीयों ने सलाह देने के लिए हेल्पलाइन की स्थापना की है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 अप्रैल को ट्वीट में लिखा कि पीएम जस्टिन ट्रूडो के साथ बात हुई है। इस कठिन समय में कनाडा में भारतीय नागरिकों की देखभाल के लिए उनका धन्यवाद। कनाडा अब 16 लाख भारतीय मूल के लोग और 7 लाख भारतीय नागरिकों की मेजबानी करता है, जो कि छोटी आबादी वाले देश के लिए काफी ज्यादा है।

हाल के वर्षों में कनाडा भारतीय छात्रों और उच्च कुशल युवाओं के लिए पसंदीदा स्थान बन गया है। 2015 में भारतीय छात्रों की संख्या 31,975 से बढ़कर साल 2019-20 में 2 लाख 25 हजार हो गई, इस दौरान भारतीय छात्रों की संख्या में अभूतपूर्व 700 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

कनाडा एकमात्र विकसित देश है जो हर साल लगभग 3 लाख 50 हजार प्रवासियों को स्वीकार करता है। भारतीयों को उनकी शैक्षिक उपलब्धियों और भाषाई क्षमताओं के कारण उनका हिस्सा ज्यादा है। 2016 में इमिग्रेशन के लिए 39,705 भारतीयों को मंजूरी दी गई थी, जबकि 2019 में 80,685 भारतीय को मंजूरी मिली, जो की 200 प्रतिशत ज्यादा है।

Posted By: Manish Pandey

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