नई दिल्ली (पीटीआई)। सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) ने परिवार नियोजन भत्ता खत्म करने के मामले में केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है। सरकार ने अपने उन कर्मियों का भत्ता खत्म किया है जिन्होंने खुद या उनके जीवनसाथी ने नसबंदी करा ली है। सरकार का मानना है कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए अब जागरूकता पैदा करने की जरूरत नहीं है।

कैट के सदस्य केएन श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली पीठ ने कांस्टेबल बाबूलाल मीथरवाल की याचिका पर सरकार और दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता ने बताया है कि उसने सन 2011 में नसबंदी कराई थी और उसे तभी से प्रति माह 210 रुपये परिवार नियोजन भत्ता मिल रहा था। लेकिन जून 2017 में बिना कोई कारण बताए उसका यह भत्ता रोक दिया गया। कैट में मामले की अगली सुनवाई 21 मई को होगी।

केंद्र सरकार ने परिवार नियोजन को बढ़ावा देने के लिए सन 1979 में दो या तीन बच्चों वाले कर्मियों को नसबंदी कराने पर विशेष भत्ता देने का नियम बनाया था। लेकिन एक जुलाई, 2017 को उसने इस नियम को खत्म कर दिया। सातवें वेतन आयोग की सिफारिश के अनुसार जनसंख्या नियंत्रण के लिए अब विशेष भत्ता दिए जाने की जरूरत नहीं है। छोटे परिवार के लिए लोगों में जागरूकता पैदा करने का दौर अब खत्म हो चुका है।

बाबूलाल की याचिका में कहा गया है कि परिवार नियोजन भत्ते का नियम नए मामलों पर लागू होना चाहिए, न कि उन कर्मियों पर जो पूर्व में नसबंदी कराकर जनसंख्या नियंत्रण की कोशिश में सहयोग दे चुके हैं। कांस्टेबल ने सरकार के भत्ता रोकने के फैसले को उनके संविधान प्रदत्त मूल अधिकारों का उल्लंघन बताया है। मामले की पैरवी अधिवक्ता ज्ञानंत सिंह कर रहे हैं।

 

Posted By: Kishor Joshi

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