मिड डे, मुंबई। पूजा हरिकिशन लोहट (24 साल) एक साल की बच्ची के साथ मुंबई के मलाड पुलिस स्टेशन पहुंची। वह उस गुमशुदा बच्ची की मां को ढूंढना चाहती थी। उसने पुलिस को बताया कि मलाड रेलवे स्टेशन के पास मछली बाजार में 30-35 साल की एक महिला शौचालय जाने का बहाना कर उसके पास यह बच्ची छोड़ गई।

उसने दावा किया कि मां के न लौटने पर वह बच्ची को पुलिस के हवाले करने आई है। लेकिन तफ्तीश में पुलिस कांस्टेबल राजेश पांडेय ने देखा कि वह नन्हीं बच्ची पुलिस वालों के पास रोती है पर उस अनजान महिला के पास जाते ही चुप हो जाती है। जांच की तो पता चला कि वह महिला ही उस बच्ची की मां है और गरीबी और ड्रग एडिक्ट चौथे पति से तंग आकर वह बच्ची को अपने से अलग करना चाहती थी।

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इस उलझे केस को अपनी सूझबूझ से सुलझाने वाले मलाड पुलिस स्टेशन में कांस्टेबल राजेश पांडेय के लिए यह कोई नई बात नहीं है। 1993 बैच के महाराष्ट्र पुलिस के कांस्टेबल राजेश पांडेय ने देश के विभिन्न हिस्सों से पिछले पांच सालों में 250 से अधिक लापता बच्चों को बचाया है। उन्होंने इतनी ही संख्या में वयस्कों को भी वर्ष 2011 से अब तक अपने घर वालों से मिलाया है। राजेश पांडेय पिछले दो सालों से उत्तरी मुंबई के मलाड पुलिस स्टेशन में तैनात हैं। वह लापता मामलों के इंचार्ज हैं।

कांस्टेबल राजेश पांडेय ने बच्ची को अलग करने की कोशिश कर रही मां पूजा को चेतावनी देकर छोड़ दिया है और बच्ची को पूजा के मां-बाप के हवाले यह कह कर किया कि उस बच्ची के साथ कुछ गलत किया तो सजा मिलेगी। इस जांच में मालवानी पुलिस स्टेशन के पीएसआइ सोनावने ने भी खासी मदद की।

Edited By: Sanjeev Tiwari