मुंबई, [ओमप्रकाश तिवारी]। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चह्वाण से चाहे शरद पवार नाराज हों, चाहे कांग्रेस के विधायक उनके विरुद्ध बगावत पर उतारू हों, लेकिन उनके बदले जाने की संभावनाएं कम ही हैं। क्योंकि उनमें कांग्रेस हाईकमान को सातारा का वह पानी बोलता दिख रहा है, जिसकी पवार के आगे घुटने टेकने की संभावना न के बराबर हैं।

नवंबर, 2010 में कांग्रेस के मुख्यमंत्री अशोक चह्वाण सहित दो अन्य पूर्व कांग्रेसी मुख्यमंत्रियों का नाम उछलने केबाद छवि केसंकट से घिरी कांग्रेस ने मिस्टर क्लीन पृथ्वीराज चह्वाण को दिल्ली से मुख्यमंत्री बनाकर भेजा था। पृथ्वीराज को महाराष्ट्र की अंदरूनी राजनीति से तब भी अनजान माना जा रहा था, और अब भी उन्हें अनाड़ी ही समझा जाता है। लेकिन अपनी साफ-सुथरी छवि के साथ पूरी सरकार की सफाई का जो अभियान उन्होंने चलाया है, उससे सबसे ज्यादा नुकसान राज्य में कांग्रेस की घनिष्ठ सहयोगी राकांपा को हो रहा है। यही कारण है कि भविष्य में मुख्यमंत्री पद पर निगाहें गड़ाए बैठी राकांपा इन दिनों पृथ्वीराज के नेतृत्व से न सिर्फ असहज महसूस कर रही है, बल्कि कांग्रेस आलाकमान से उनकेबदलाव की मांग भी करने लगी है।

सन् 1999 में कांग्रेस से अलग होने के बाद से ही शरद पवार अपने नेतृत्ववाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को सत्ता के शीर्ष पर लाने का सपना देखते आ रहे हैं। भतीजे अजीत पवार के उपमुख्यमंत्री बनने केबाद से उन्हें यह लक्ष्य और नजदीक लगने लगा था। लेकिन इसी बीच पृथ्वीराज एक रोड़ा बनकर उनके रास्ते में आ गए हैं, जिन्हें अपने इशारों पर नचाना पवार के लिए मुश्किल हो रहा है। जबकि 1999 से अब तक बने कांग्रेस के अन्य तीन मुख्यमंत्री पवार की वरिष्ठता के नीचे दबते दिखाई देते रहे हैं। इसे संयोग ही कहेंगे कि पृथ्वीराज महाराष्ट्र केउसी सातारा जनपद के हैं जिसके नेता हमेशा शरद पवार एवं उनके गुरु यशवंतराव चह्वाण के लिए सिरदर्द बनते रहे हैं।

1999 में कांग्रेस से पवार की बगावत के समय प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहे प्रतापराव भोसले भी सातारा के ही थे। उन्होंने उस समय न सिर्फ पवार का जमकर मुकाबला किया, बल्कि इस टूट के कुछ ही माह बाद हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को सर्वाधिकसीटें और सत्ता दिलवाने में भी सफल रहे। इससे पहले कराड लोकसभा सीट से सांसद चुने जानेवाले पृथ्वीराज के पिता आनंदराव चह्वाण एवं माता प्रमिला काकी चह्वाण शरद पवार के गुरु यशवंतराव चह्वाण का मुकाबला करने के लिए जाने जाते रहे हैं। सातारा छत्रपति शिवाजी महाराज का क्षेत्र माना जाता है। उनकेसत्रहवें वंशज उदयनराजे भोसले पवार की पार्टी राकांपा के सांसद हैं। इसके बावजूद उन पर कभी शरद पवार एवं अजीत पवार की मर्जी चलती दिखाई नहीं देती।

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