नई दिल्ली, संजय मिश्रा। लोकसभा चुनाव में लगातार दूसरी बार हुई करारी शिकस्त के बाद गंभीर संकट से रूबरू हो रही कांग्रेस में हड़कंप मच गया है। हार से पैदा हुए हालातों की समीक्षा के साथ पार्टी को संकट से बाहर निकालने पर चर्चा के लिए शनिवार को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक बुलाई गई है। कार्यसमिति की बैठक में राहुल गांधी द्वारा इस्तीफे की पेशकश करने की संभावना जताई जा रही है। हार पर मचे इस हाहाकार में सूबों की कमान थामने वाले कई पार्टी नेताओं के इस्तीफे का सिलसिला शुरू भी हो गया है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर ने भी इस्तीफे की पेशकश की है।

कांग्रेस की हार इस लिहाज से भी असाधारण है कि पार्टी एक बार फिर लोकसभा में आधिकारिक विपक्ष का दर्जा हासिल करने लायक सीट जीतने में नाकाम रही है। इस चुनाव में कांग्रेस को 52 सीटें मिली हैं जबकि विपक्ष का दर्जा प्राप्त करने के लिए कम से कम दो से तीन और सीटों की जरूरत थी। सीटों के इस आंकड़े की वजह यह है कि कांग्रेस 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अपना खाता तक नहीं खोल पायी। इसमें हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान जैसे वे राज्य भी शामिल हैं जहां कांग्रेस का भाजपा से सीधा मुकाबला था।

कांग्रेस के इस बेहद खराब प्रदर्शन को देखते हुए राहुल गांधी कार्यसमिति की बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफे की पेशकश कर सकते हैं। पार्टी सूत्रों ने राहुल के इस्तीफे की पेशकश की संभावना से इनकार नहीं किया। हालांकि सूत्र का यह भी कहना था कि मौजूदा हालत में पार्टी अध्यक्ष का इस्तीफा संकट का समाधान नहीं है बल्कि इससे स्थिति और भी ज्यादा जटिल होगी। कांग्रेस को हार के इस दौर से बाहर निकालने की तात्कालिक चुनौती बेशक बेहद महत्वपूर्ण है मगर पार्टी की राजनीतिक वापसी का दीर्घकालिक रोडमैप उससे कम अहम नहीं है। ऐसे में राहुल के इस्तीफे को स्वीकार करने की बजाय कार्यसमिति हार की गहन समीक्षा के लिए कदम उठाने के साथ कुछ ठोस दीर्घकालिक विकल्पों की दशा-दिशा तय करने पर मंथन करेगी। पार्टी सूत्रों के इन संकेतों से साफ है कि राहुल के इस्तीफे की पेशकश को कार्यसमिति स्वीकार नहीं करेगी। वैसे राहुल गांधी ने चुनाव नतीजे आने के बाद अपनी पहली प्रतिक्रिया में हार की जिम्मेदारी लेने का साहस दिखाया था। साथ ही यह भी कहा था कि सभी स्तरों पर पराजय के कारणों की समीक्षा कर जवाबदेही तय की जाएगी।

हार की जवाबदेही के सवालों पर ही सूबों के प्रदेश प्रमुखों ने कांग्रेस अध्यक्ष को इस्तीफा भेजने की शुरुआत कर दी है। उत्तर प्रदेश में पार्टी की हुई सबसे ज्यादा दुर्गति के बाद राज बब्बर ने प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफे की पेशकश की है। ओडिशा कांग्रेस के अध्यक्ष निरंजन पटनायक ने भी अपना इस्तीफा हाईकमान को भेज दिया है। इसी तरह कर्नाटक में कांग्रेस के सफाए के बाद प्रदेश के दिग्गज नेता एचके पाटिल ने प्रदेश चुनाव अभियान समिति के अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। अमेठी में राहुल गांधी की हार के मद्देनजर जिला कांग्रेस अध्यक्ष योगेंद्र मिश्रा ने भी त्यागपत्र दे दिया है। यह तय माना जा रहा कि कांग्रेस को संकट के दौर से उबारने के लिए पार्टी नेतृत्व पर अब संगठन के तौर-तरीकों से लेकर रीति-नीति में व्यापक और निर्णायक बदलाव का दबाव कहीं ज्यादा बढ़ गया है।

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Posted By: Nitin Arora

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