'महंगाई से त्रस्त जनता की जेब पर डाका डालने का यह नया तरीका', UPI शुल्क पर कांग्रेस का सरकार पर तीखा हमला
कांग्रेस ने यूपीआई पर 2000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर शुल्क लगाने के सरकार के कथित फैसले पर तीखा हमला बोला है।

कांग्रेस ने 2000 रुपये से अधिक यूपीआई लेनदेन पर शुल्क का विरोध किया

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। यूपीआई के 2000 रुपए से अधिक की हर लेन-देन पर अब शुल्क लगाए जाने का दावा करते हुए मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने भाजपा सरकार के खिलाफ तीखा हमला बोला है।
लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया गया है सरकार ने चुपचाप यूपीआई पर फीस लगाने का रास्ता खोल दिया है और ट्रेड डील की तरह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरिका के सामने सरेंडर का कर दिया है।
UPI पर फीस पर कांग्रेस का विरोध
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी इसका विरोध करते हुए कहा कि सरकार ने पहले कहा था कि यूपीआई पर कोई शुल्क नहीं है मगर अब इसे बदलकर 2000 रुपए तक के ट्रांजेक्शन पर फीस लगाया जा रहा है।
महंगाई से त्रस्त जनता को राहत देने के बजाय मोदी सरकार हर रोज उनकी जेब पर डाका डालने का नया तरीका खोज रही है।
कांग्रेस ने यूपीआई ट्रांजैक्शन संबंधी सरकार की ताजा अधिसूचना के आधार पर दो हजार रुपए से अधिक की लेन-देन पर टैक्स लगाने का यह दावा किया।
राहुल गांधी का सरकार पर हमला
राहुल गांधी ने एक्स पोस्ट में कहा कि अब '2000 से ऊपर के खरीद-फरोख्त यूपीआई लेन-देन पर एमडीआर लगाया जा सकता है। इन लेन-देन की संख्या भले ही सिर्फ पांच प्रतिशत हो लेकिन यूपीआई के कुल लेन-देन का करीब 65 प्रतिशत इन्हीं में है।
सरकार कहती है कि ग्राहक से कोई फीस नहीं ली जाएगी। लेकिन दुकानदार पर लगने वाली फीस आखिर आएगी कहां से? कीमतों में जुड़कर ग्राहक की जेब से।
अमेरिकी पेमेंट कंपनियां लंबे समय से भारत की शून्य-एमडीआर नीति का विरोध करती रही हैं। अब मोदी सरकार ने ठीक उसी दिशा में नीति बदलने का रास्ता खोल दिया है। अमेरिका ट्रेड डील की तरह कंप्रोमाइज्ड पीएम मोदी एक बार फिर अमेरिकी दबाव के सामने सरेंडर कर रहे हैं।'
खरगे ने क्या कहा?
मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि गगनचुंबी महंगाई से आम आदमी की जेब पहले ही खाली है। थोक महंगाई 10 प्रतिशत के करीब है और भाजपा सरकार ने जनता पर 'डिजिटल पेमेंट टैक्स' लगाकर उनकी बची-खुची बचत को भी तबाह करने की योजना बना दी है।
मोदी सरकार का सबसे बड़ा पलटवार देखिए 10 साल पहले नोटबंदी करके देश की अर्थव्यवस्था को झटका दिया गया। जब नोटबंदी के विनाशकारी नतीजों पर सवाल उठे तो सरकार ने दलील दी थी कि नोटबंदी डिजिटल पेमेंटस और कैशलेस इकोनामी को बढ़ावा देने के लिए थोपी गई।
वित्तमंत्री ने हाल ही में संसद में कहा था कि यूपीआई पर कोई टैक्स या शुल्क नहीं लगेंगे, पर सामने आ रही खबरों के अनुसार 5000 के ट्रांजेक्शन पर 25 रुपए और 10000 पर 50 रुपए तक की संभावित वसूली की जाएगी।
सरकार से इसकी सच्चाई बताने की मांग करते हुए खरगे ने कहा कि क्या उसे यह नहीं पता कि व्यापारी पर पड़ने वाला अतिरिक्त बोझ आखिरकार कीमतों के जरिए आम उपभोक्ता की जेब से ही वसूला जाएगा।
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