नई दिल्ली। गुरुवार से शुरु हुए संसद के शीतकालीन सत्र के पहले ही दिन कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक बड़ा बयान दिया है। संविधान पर रखी गई चर्चा के दौरान कांग्रेस संसदीय दल के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि अगर डॉक्टर भीम राव अंबेडकर का संविधान बदलने की कोशिश की गई तो भारी रक्तपात होगा। इसलिए दोबारा संविधान समीक्षा की बात ही नहीं की जानी चाहिए।

हालांकि, मल्लिकार्जुन खड़गे के इस शब्द के फौरन बाद लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने रक्तपात को संसदीय कार्यवाही की रिकॉर्डिंग से हटाने के निर्देश दिए।

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खड़गे ने लोकसभा के अंदर कहा कि प्रधानमंत्री सबसे पहले पार्टी नेताओं की तरफ से लगातार आ रहे गैर-जिम्मेदाराना बयान पर चुप्पी तोड़ें।

इससे पहले मल्लिकार्जुन खड़गे ने गृहमंत्री राजनाथ सिंह की तरफ से संसद के मूल प्रस्तावना में दिए गए सेक्यूलर शब्द को लेकर जताई गई आपत्ति पर भी ऊंगली उठाई थी।

राजनाथ सिंह ने कहा था कि 'धर्मनिरपेक्ष' शब्द का राजनीति में सबसे अधिक गलत इस्तेमाल होता है और अगर इसकी जरूरत होती तो संविधान निर्माता संविधान में 'समाजवादी व धर्मनिरपेक्ष' जैसे शब्दों का इस्तेमाल जरूर करते।

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Posted By: Rajesh Kumar

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