यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 15, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
दलितों के बीच फिर जनाधार बढ़ाने में जुटी कांग्रेस, राहुल गांधी ने कांशीराम को बताया समाज सुधारक
बहुजन राजनीति की फिर से धुरी बनने का दांव कांग्रेस चलने लगी है। राहुल गांधी तथा प्रियंका ने कांशीराम जयंती ...और पढ़ें

संजय मिश्र, जागरण नई दिल्ली। जातिगत जनगणना के मुद्दे के सहारे कांग्रेस का सामाजिक दायरा बढ़ाने की पहल शुरू करने के बाद पिछले कुछ समय से अपने परंपरागत दलित सियासी आधार को फिर से जोड़ने का दांव चलने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है।
अनुसूचित जाति (एससी) का अपना आधार वापस हासिल करने की इस कोशिश में पार्टी की निगाहें विशेष रूप से बसपा की बहुजन राजनीति पर लगातार कमजोर होती पकड़ की ओर है। बसपा के संस्थापक कांशीराम की 91वीं जयंती के मौके पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी तथा पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा का उन्हें महान समाज सुधारक तथा सामाजिक न्याय की लड़ाई का मार्गदर्शक बताते हुए दी गई श्रद्धांजलि पार्टी के सियासी इरादों का साफ संदेश है।
बसपा पर बीजेपी की राजनीति का संरक्षण करने का आरोप
लोकसभा चुनाव 2024 के समय से ही कांग्रेस तथा सपा जैसे विपक्षी दल बसपा पर भाजपा की राजनीति का संरक्षण करने का आरोप लगाते आ रहे हैं और इसको लेकर मायावती कई बार निशाने पर भी रही हैं। दरअसल कांग्रेस नेतृत्व ने कांशीराम की स्मृतियों की प्रशंसा कर बसपा की सिकुड़ती जमीन के दलितों-वंचितों के हितों की लड़ाई का सबसे बड़ा पहरुआ कांग्रेस के ही होने का संदेश देने की कोशिश की है।
राहुल गांधी ने काशीराम को बताया समाज सुधारक
राहुल गांधी ने कांशीराम को उनकी जयंती पर नमन करते शनिवार को एक्स पोस्ट में उन्हें महान समाज सुधारक करार दिया। कांग्रेस नेता ने कहा कि दलितों, वंचितों और शोषितों के अधिकारों के लिए उनका संघर्ष, सामाजिक न्याय की इस लड़ाई में हमारा हर कदम पर मार्गदर्शन करता रहेगा। बहुजन राजनीति को साधने की कांग्रेस की गंभीर कोशिश को आगे बढ़ाने की इस पहल में पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा भी शामिल होने से पीछे नहीं रहीं।
प्रियंका ने एक्स पोस्ट में श्रद्धांजलि देते हुए कहा
'दलित, वंचित, शोषित और पिछड़े वर्गों के अधिकारों की प्रखर आवाज, सामाजिक न्याय के पुरोधा और बहुजन नायक मान्यवर कांशीराम की जयंती पर उन्हें सादर नमन। उन्होंने अपने विचारों और सामाजिक आंदोलनों के जरिये सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों को नई ऊंचाई दी। उनके विचार पीढि़यों को प्रेरित करते रहेंगे।'
शून्य पर पहुंची बसपा, दलितों में पैठ बनाने के लिए जुटी कांग्रेस
पिछले लोकसभा चुनाव में शून्य पर पहुंची बसपा की लगभग ठहराव की स्थिति में पहुंच चुकी राजनीति को देखते हुए कांग्रेस उत्तरप्रदेश समेत पूरे देश में दलितों के बीच अपनी पैठ बढ़ाने की लगातार पहल कर रही है। चाहे महाराष्ट्र में बाबा साहब आंबेडकर, ज्योति बा फूले से लेकर संत रविदास की विरासत को सम्मान देने के लिए किए जाने वाले आयोजन हो या फिर संविधान रक्षा से जुड़े कार्यक्रमों की लगातार हो रही श्रृंखलाएं।
इसलिए जाति जनगणना को लेकर कांग्रेस मुखर
कांग्रेस अपनी सियासी ताकत की बहाली के लिए सामाजिक दायरे के विस्तार को अपरिहार्य मान रही है और एसी-एसटी तथा ओबीसी को साधने के लिए जाति जनगणना को लेकर उसकी मुखरता की एक बड़ी वजह इसे ही माना जा रहा है। कभी लंबे अर्से तक केंद्र तथा राज्यों की सत्ता में रही कांग्रेस के तीन प्रमुख सामाजिक आधार: अगड़े, दलित और अल्पसंख्यक थे।
नब्बे के दशक में कांग्रेस के दलित वोट में बसपा ने लगाई थी सेंध
लेकिन सामाजिक न्याय के उफान और भाजपा के हिन्दुत्व की राजनीति में पार्टी का यह आधार ध्वस्त हो गया। इसी दरम्यान नब्बे के दशक में कांशीराम और फिर मायावती के नेतृत्व में बसपा के उभार ने कांग्रेस के दलित वोट बैंक को भी गंभीर छति पहुंचाई। अब जब बसपा की राजनीति दुविधा के दोराहे पर डांवाडोल है तो कांग्रेस यह प्रयास कर रही है कि बहुजन सियासत की चाभी फिर एक बार उसके हाथ आ जाए।
