संजय मिश्र, नई दिल्ली। राष्ट्रपति चुनाव में विपक्षी गोलबंदी के लिए क्षेत्रीय दलों को साथ लाने की कोशिशों में जुटी कांग्रेस के नेता बीजू जनता दल के शीर्ष नेतृत्व से संवाद की संभावनाएं टटोल रहे हैं। राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए के समक्ष मजबूत चुनौती पेश करने के लिहाज से बीजद, अन्नाद्रमुक और टीआरएस जैसे दलों के सियासी रुख कांग्रेस के लिए बेहद मायने रखते हैं। समझा जाता है कि इसी रणनीति के तहत अनौपचारिक वार्ता चैनलों के जरिए कांग्रेस नेता राष्ट्रपति चुनाव को लेकर बीजद का रुख भांपने का प्रयास कर रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार ओडिशा कांग्रेस के कुछ नेता और पार्टी के एक राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारी बीजद प्रमुख मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के करीबी लोगों के जरिए उनका सियासी मिजाज जानने की यह कोशिश कर रहे हैं। पार्टी रणनीतिकारों की ओर से दिए जा रहे संकेतों के मुताबिक दूतों के जरिए संपर्क के इस प्रयास के दौरान बीजद की ओर से सकारात्मक संकेत मिले तो फिर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और नवीन पटनायक के बीच सीधी न सही मगर अनौपचारिक संवाद की गुंजाइश की संभावनाओं को नकारा नहीं जा रहा।

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अपने उम्मीदवार को राष्ट्रपति बनाने लिए राजग को महज 20 हजार वोट की जरूरत है और बीजद, टीआरएस या अन्नाद्रमुक में कोई भी तैयार होता है तो कोई परेशानी नहीं होगी। कांग्रेस का का मानना है कि ओडिशा में भाजपा ने जिस तरह अपनी राजनीतिक रणनीति बनाई है उसमें बीजद सीधे निशाने पर है और इसे देखते हुए नवीन पटनायक एनडीए का साथ देने का विचार छोड़ सकते हैं। इसीलिए पार्टी प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने बुधवार को क्षेत्रीय पार्टियों से कांग्रेस विरोध और अहं को छोड़ कर साथ आने की अपील की थी।

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कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी राष्ट्रपति चुनाव के लिए फिलहाल उन विपक्षी दलों के नेताओं से चर्चा कर रही हैं जो यूपीए के साथी रहे हैं या फिर भाजपा के खिलाफ विपक्षी एकता के लिए खुलकर कांग्रेस के साथ आने को तैयार हैं। सोनिया की इस क्रम में एनसीपी नेता शरद पवार से बुधवार को मुलाकात हुई। दस जनपथ पर हुई करीब पांच साल बाद हुई इस मुलाकात में सोनिया-पवार ने राष्ट्रपति चुनाव में विपक्षी गोलबंदी का दायरा बढ़ाने पर बात की। बताया जाता है कि सोनिया ने पवार से भी अपने सियासी रुतबे का उपयोग करते हुए पहल का अनुरोध किया। पवार से पहले सोनिया की नीतीश कुमार, सीताराम येचुरी और डी राजा से मुलाकात हो चुकी थी। लालू प्रसाद, डीएमके नेता स्टालिन और एनसी नेता फारुख अब्दुल्ला से भी उनकी जल्द मुलाकात होनी है।

Posted By: Ravindra Pratap Sing

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