परिसीमन पर विपक्ष का जवाबी दांव, सरकार से सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग; क्या है प्लान?
कांग्रेस ने परिसीमन बिल पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है।
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कांग्रेस ने परिसीमन बिल पर सर्वदलीय बैठक की मांग की।
HighLights
कांग्रेस ने परिसीमन बिल पर सर्वदलीय बैठक की मांग की।
खरगे ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर चिंता जताई।
सरकार को बिल जबरन पारित न करने की चेतावनी दी।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। चुनाव आयोग के एसआइआर विवाद में सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी विपक्ष की लड़ाई के बीच परिसीमन बिल दुबारा लाने की अटकलों के मद्देनजर कांग्रेस ने भी सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग का जवाबी दांव चल दिया।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मानसून सत्र खत्म होने के बाद भी अभी तक सत्रावसान नहीं किए जाने के पीछे सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से परिसीमन के प्रस्तावों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की। साथ ही को सरकार को आगाह किया कि परिसीमन बिल जैसे दूरगामी महत्व के संविधान संशोधन जेसे विधेयक को जोर-जबरदस्ती से पारित कराने का प्रयास न करे।
संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजीजू की ओर से परिसीमन बिल पर सरकार की ओर से पहल जारी रखने के दिए संकेतों के बाद सियासी हलकों में एक बार फिर विशेष सत्र बुलाने की अटकलें तेज हो गई है। सरकार द्वारा मानसून सत्र का दो महीने बाद भी सत्रावसान नहीं किए जाने के कारण भी इन अटकलों को बल मिल रहा है।
इसके मद्देनजर ही मल्लिकार्जुन खरगे ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर सर्वदलीय बैठक बुलाने का आग्रह किया। मानसून सत्र के 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद से 64 दिन बाद भी सत्रावसान नहीं को 'अभूतपूर्व' बताते हुए खरगे ने इस पत्र में बीते 11 अप्रैल को प्रधानमंत्री को परिसीमन पर लिखे अपने पत्र का हवाला देते हुए कहा है कि कोई भी संवैधानिक संशोधन विधेयक लाने से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाया जाना चाहिए मगर ऐसा नहीं किया गया।
इसकी बजाय 14 अप्रैल की देर शाम परिसीमन पर विधेयकों को सार्वजनिक किया गया तथा 16-17 अप्रैल को एक विशेष सत्र बुलाया। लेकिन लोकसभा में परिसीमन विधेयक जरूरी दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में बुरी तरह विफल रहा।
खरगे ने पीएम को इसके बाद 16 जुलाई और 27 अगस्त को सर्वदलीय बैठक बुलाने का अनुरोध करते हुए लिखे अपने पत्र की याद दिलाते हुए कहा है कि अब चौथी बार इसके लिए वे आग्रह कर रहे हैं कि परिसीमन के नए प्रस्तावों को अंतिम रूप देने से पहले उन पर विस्तृत चर्चा के लिए एक सर्वदलीय बैठक बुलाएं।
कांग्रेस अध्यक्ष ने राजनीतिक दलों को आपस में एक-दूसरे के साथ और अन्य सभी संबंधित पक्षों के साथ विचार-विमर्श करने के लिए पर्याप्त समय दिए जाने की जरूरत बताते हुए आगाह किया कि परिसीमन बिल संसद में जबरन पारित कराने की कोशिश न की जाए अन्यथा इसका भी हश्र कुछ पहले जैसा ही होगा।
