नई दिल्ली, जेएनएन। पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने ना सिर्फ अपना जनाधार गंवाया बल्कि उत्तराखंड जैसे राज्य जहां पर वह पिछले पांच साल से सत्ता में थी और जीत को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रही थी वहां भी उसने अपनी सत्ता भाजपा के हाथों गंवा दी।

राहुल के नेतृत्व पर सवाल

इसके साथ ही, कांग्रेस का यूपी समेत अन्य राज्यों में बेहतर प्रदर्शन ना कर पाना कांग्रेस के केन्द्रीय नेतृत्व पर सवाल खड़ा कर रहा है। राजनीतिक जानकारों की मानें तो इस वक्त कांग्रेस की करारी हार की एक बड़ी वजह खुद कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी है और ये बात पार्टी कार्यकर्ता भी अच्छी तरह जानते हैं। राहुल गांधी जब से एक तरह से पार्टी का नेतृत्व संभाला है पार्टी की हालत लगातार खराब होती जा रही है। ऐसे में अगर केन्द्रीय नेतृत्व के स्तर पर कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया और यही स्थिति रही तो आनेवाले दिनों में इस पार्टी का राजनीतिक भविष्य अधर में आ जाएगा।

जनता ने हमेशा राहुल के नेतृत्व को नकारा

राजनीतिक विश्लेषकों का तो यहां तक कहना है कि बिहार चुनाव के वक्त कांग्रेस को जो विधानसभा सीटें आयी थी वह कांग्रेस के नाम पर नहीं बल्कि महागठबंधन के नाम पर मिली थी। उस वक्त बिहार चुनाव में चूंकि वोटों का महागठबंधन के पक्ष में ध्रुवीकरण हुआ था लिहाजा इसका फायदा कांग्रेस को भी मिला। भले ही इसे कांग्रेस अपनी जीत बता रही हो ये अलग बात है लेकिन जनता ने राहुल के नेतृत्व को हमेशा नकारा है।

ऐसी स्थिति में आनेवाले 2019 के लोकसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक जानकारों का यह मानना है कि पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्व की कमान राहुल की जगह किसी और को सौंपने पर विचार करना चाहिए क्योंकि यह राहुल की बूते की बात नहीं है कि वह पार्टी को आगे ले जा सकें या फिर पार्टी को चुनाव जीता सके।

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Posted By: Rajesh Kumar

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