नई दिल्ली। अलगाववादी नेता मसर्रत आलम की रिहाई को लेकर आज संसद में खूब हंगामा हुआ। विपक्ष की मांग पर प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने इस मुद्दे पर सफाई दी, जिस पर कांग्रेस तंज कसते हुए कांग्रेस ने उसे घड़ियाली आंसू करार दिया है।

कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने संसद में दिए प्रधानमंत्री के बयान को स्पष्टीकरण कम और घड़ियाली आंसू ज्यादा बताया है। उनहोंने कहा कि गृहमंत्री ने अपने बयान में ये कहने की कोशिश की थी कि 2012 के बाद से मसर्रत आलम को जेल में बंद रखना गैरकानूनी था। इस बात को लेकर उन्होंने (मनीष तिवारी) प्रधानमंत्री से पूछा कि क्या मसर्रत राजनीतिक कैदी नहीं है।

कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने प्रधानमंत्री के जानकारी न होने वाले बयान को संदाहस्पद बताया है। वहीं रणदीप सिंह सुरजेवाला ने प्रधानमंत्री से अपील की है कि वे घड़ियाली आंसू बहाने का दिखावा न करें बल्कि राष्ट्र विरोधी तत्वों के खिलाफ ठोस नीति बनाएं।

इन सब के बीच नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) ने भी भाजपा और पीडीपी पर निशाना साधा है। नेकां के देवेंद्र राणा ने कहा है कि यहां जो भी हो रहा है वो दोनों दलों (पीडीपी-भाजपा) की सहमति से हो रहा है। राणा ने कहा कि इन सबकी स्क्रिप्ट शपथ ग्रहण के पहले ही तैयारी की गई थी और ये सब कॉमन मिनिमम प्रोग्राम से ध्यान हटाने के लिए किया जा रहा है।

वहीं इससे पहले संसद में प्रधानमंत्री के बयान पर कांग्रेस संसदीय दल के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी सवाल उठाए। खड़गे ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में क्या हो रहा है ये प्रधानमंत्री को नहीं पता, तो क्यों नहीं भाजपा वहां की सरकार से अपना समर्थन वापस ले रही है। उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री देश की एकता और अखंडता को बनाए रखना चाहते हैं तो उन्हें जम्मू-कश्मीर की सरकार से अपना समर्थन वापस ले लेना चाहिए।

बता दें कि मसर्रत आलम की रिहाई पर आज केंद्र सरकार ने सफाई दी। इस मामले पर पहले गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार ने प्रदेश सरकार से इस बारे में और रिपोर्ट मांगी गई है। जैसे ही आगे की रिपोर्ट आती है हम वैसे ही इसकी जानकारी सदन को देंगे। वहीं प्रधानमंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में जो हुआ उसकी जानकारी हमें नहीं थी।

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Edited By: anand raj