धामी सरकार ने अदाणी ग्रुप के लिए रद की सरकारी कंपनियों की बिजली परियोजना, कांग्रेस ने लगाया आरोप
कांग्रेस ने उत्तराखंड की भाजपा सरकार पर अदाणी समूह को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया है, जिसमें सरकारी कंपनियों के ...और पढ़ें

सरकारी बिजली परियोजना रद कर अदाणी पावर को ठेका दिया गया

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। कांग्रेस ने उत्तराखंड की भाजपा सरकार पर अदाणी समूह को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाते हुए दावा किया कि सरकारी कंपनियों (पीएसयू) के लिए प्रस्तावित थर्मल पावर प्रोजेक्ट को रद कर बिजली आपूर्ति का ठेका अदाणी पावर को सौंप दिया गया है। पार्टी ने यह दावा भी कि अदाणी पावर को बिजली परियोजना सौंपने के लिए उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने 86 में से 84 नियमों-शर्तों को बदल दिया।
उत्तराखंड चुनाव से पहले इस मुद्दे का खुलासा करते हुए कांग्रेस ने यह एलान भी किया कि पार्टी सत्ता में आयी तो इस बिजली परियोजना की न केवल समीक्षा करेगी बल्कि इसमें अनियमितता के लिए जो लोग भी दोषी पाए जाएंगे उन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
अदाणी को लाभ पहुंचाने के लिए बदले नियम
कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने पार्टी दफ्तर 24 अकबर रोड पर गुरूवार को प्रेस कांफ्रेंस करते हुए यह आरोप लगाया और कहा कि धामी सरकार ने अदाणी पावर के छत्तीसगढ़ स्थित प्लांट से 25 साल तक बिजली खरीदने का रास्ता साफ करने के लिए यूजेवीएन-टीएचडीसी की प्रस्तावित सरकारी परियोजना को रद्द कर दिया।
16 जनवरी 2025 को थर्मल पावर प्लांट लगाने के लिए यूजेवीएन-टीएचडीसी के संयुक्त पब्लिक सेक्टर प्रोजेक्ट को अचानक रद्द कर 3 फरवरी 2025 को नया टेंडर जारी किया गया।
खेड़ा ने आरोप लगाया कि अदाणी पावर को टेंडर देने के लिए उसके अनुरूप ही 86 में से 84 शर्तों में बदलाव कर दिए गए और इस बदलाव में पावर प्लांट को उत्तराखंड से बाहर देश के किसी भी हिस्से में लगाने की अनुमति दी गई।
साथ ही पूरे 1320 मेगावाट बिजली की आपूर्ति एक ही बिडर से लेने की अनिवार्यता तय की गई और दूसरे राज्य से बिजली लाने की ट्रांसमिशन लागत का बोझ उत्तराखंड की जनता पर डाल दिया गया।
फिक्स्ड चार्ज सीलिंग को 70 से बढ़ाकर 75 प्रतिशत
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि पावर प्लांट निर्माण की समय सीमा बढ़ाने के अलावा फिक्स्ड चार्ज सीलिंग को 70 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत कर दिया गया और इसके तहत प्रदेश द्वारा बिजली न लेने पर भी अदाणी पावर को 25 साल तक पैसा मिलता रहे यह सुनिश्चित किया गया।
खेड़ा ने कहा कि बिजली उत्तराखंड की जनता के पैसे से खरीदी जाएगी, लेकिन पूरा प्रोजेक्ट छत्तीसगढ़ में चलेगा और 25 साल में उत्तराखंड की जनता का 1.66 लाख करोड़ रुपए अदाणी समूह को दिया जाएगा।
संयुक्त सरकारी उद्यम के तहत प्रस्तावित बिजली परियोजना को रद किए जाने को लेकर मुख्यमंत्री धामी को घेरते हुए खेड़ा ने सवाल उठाया कि जब सरकारी कंपनियों ने तय समय सीमा में कार्य पूरा करने की गारंटी दी थी उन पर अविश्वास कर परियोजना को खत्म क्यों किया गया?
टेंडर की शर्तों में बदलाव क्यों किए गए?
क्या यह टेंडर एक व्यक्ति को फायदा पहुंचाने के लिए बनाया गया था? ऐसी शर्त क्यों रखी गई कि पावर प्लांट उत्तराखंड के बाहर भी लगाया जा सकता है? अदाणी पावर को 25 साल का बिजली खरीद समझौता क्यों दिया गया?
पवन खेड़ा ने दावा करते हुए कहा कि किसी एक को फायदा पहुंचाने के लिए इसमें अनियमितता हुई है और कांग्रेस उत्तराखंड की सरकार में आएगी तो हम इस बिजली परियोजना की समीक्षा कर इसमें दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई करेंगे।
