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'वोटर लिस्ट में बदलावों की पूरी जानकारी चाहिए', EC-SIR विवाद के बीच कांग्रेस ने रखी 5 मांगें

Published: Tue, 29 Sep 2026 01:20 PM (IST)

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने चुनाव आयोग पर वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन और रजिस्ट्रेशन नियमों में बदलाव कर चुनावी निष्पक्षता से समझौता करने का आरोप लगाया है।

सीडब्ल्यूसी की बैठक में सोनिया गांधी, मल्लिरार्जुन खरगे और राहुल गांधी। (फोटो- पीटीआई।)

सीडब्ल्यूसी की बैठक में सोनिया गांधी, मल्लिरार्जुन खरगे और राहुल गांधी। (फोटो- पीटीआई।)

HighLights

  1. खरगे ने चुनाव आयोग पर चुनावी निष्पक्षता से समझौता करने का आरोप लगाया।

  2. वोटर लिस्ट से नाम हटाने और फॉर्म 6 बदलावों पर सवाल उठाए।

  3. कांग्रेस ने पारदर्शिता और स्वतंत्र जांच सहित पांच मांगें रखीं।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मंगलवार को चुनाव आयोग पर आरोप लगाया कि उसने वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) और वोटर रजिस्ट्रेशन के नियमों में बदलाव करके चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता से समझौता किया है।

उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और सरकार के खिलाफ अपना अभियान तेज करेगी। कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक को संबोधित करते हुए खरगे ने कहा कि पार्टी पर लोकतंत्र और संविधान की रक्षा करने की जिम्मेदारी है। उन्होंने ब्रिटिश शासन के दौरान वोटिंग अधिकारों के लिए कांग्रेस की लड़ाई और वोटर लिस्ट को लेकर मौजूदा अभियान के बीच समानता बताई।

खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर लगाया आरोप

उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी और मोदी सरकार के इशारे पर वोटर लिस्ट से नाम हटाए जा रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त पर सरकार की कठपुतली बनने का आरोप लगाया। इसके उलट चुनाव आयोग का कहना है कि उसके फैसलों को पूरी कानूनी मंजूरी मिली हुई है और आयुक्तों के बीच अलग-अलग राय होना संस्थागत विचार-विमर्श का हिस्सा है।

फॉर्म 6 में किए गए बदलावों पर भी उठाए सवाल

खरगे ने फॉर्म 6 में किए गए बदलावों पर भी सवाल उठाए, जिसका इस्तेमाल नए वोटरों को रजिस्टर करने के लिए किया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि नियमों में इस तरह बदलाव किए गए हैं जिनसे युवा वोटर वोटिंग के अधिकार से वंचित हो सकते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की तुलना 1988 में राजीव गांधी सरकार के उस फैसले से भी की, जिसमें वोटिंग की उम्र 21 से घटाकर 18 साल कर दी गई थी।

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, "उन्होंने नौकरियां नहीं दीं और अब वे वोट देने का अधिकार भी नहीं देना चाहते।" उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को युवाओं के सवालों से डर लगता है। खरग ने राहुल गांधी के वोटर लिस्ट से जुड़े आरोपों का समर्थन किया और महादेवपुरम, आलंद और हरियाणा व महाराष्ट्र के निर्वाचन क्षेत्रों में वोटर लिस्ट पर सवाल उठाने के लिए राहुल गांधी की तारीफ की।

उन्होंने डुप्लीकेट वोटर, संदिग्ध पते, एक ही पते पर कई वोटर रजिस्टर होने और फॉर्म 6 से जुड़ी एंट्रीज के आरोपों का जिक्र करते हुए कहा कि चुनाव आयोग को इन मुद्दों पर कार्रवाई करनी चाहिए थी। उन्होंने कहा, "अगर चुनाव आयोग ने उस दिशा में थोड़ी भी गंभीरता दिखाई होती तो आज वे सवालों के घेरे में नहीं होते और उनकी विश्वसनीयता बनी रहती।"

एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े फैसले पर उठाए सवाल

खरगे ने एसआईआर से जुड़े फैसले लेने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या यह जानना गलत था कि इस प्रक्रिया को किसने मंजूरी दी और क्यों दो चुनाव आयुक्तों को कथित तौर पर इंटरनल पोर्टल से दूर रखा गया।

कांग्रेस ने रखी पांच मांगें

खरगे ने कहा कि कांग्रेस इन पांच मांगों पर आगे बढ़ेगी-

  • वोटर लिस्ट में किए गए बड़े बदलावों का पूरा डेटा सार्वजनिक किया जाए। जिन वोटर्स के नाम हटाए गए हैं उन्हें पूरी जानकारी दी जाए और अपील करने का पूरा मौका दिया जाए।
  • राजनीतिक दलों को वोटर लिस्ट और उससे जुड़ा जरूरी डेटा आसान फॉर्मेट में और समय पर मिले।
  • गंभीर गड़बड़ियों की एक तय समय-सीमा के भीतर स्वतंत्र जांच हो।
  • चुनाव से जुड़ा डेटा और फैसले पारदर्शी होने चाहिए ताकि कोई भी राजनीतिक दल यह दावा न कर सके कि जानकारी छिपाई जा रही है।
  • खरगे ने कहा, "सबसे जरूरी बात यह है कि भारत के वोटर्स को यह भरोसा होना चाहिए कि उनका वोट सुरक्षित है।"

खरगे ने पीएम मोदी और चुनाव आयोग पर साधा निशाना

कांग्रेस अध्यक्ष ने बीजेपी और आरएसएस पर स्वतंत्र संस्थाओं को सुनियोजित तरीके से कमजोर करने का आरोप भी लगाया और कहा कि कांग्रेस चाहती है कि चुनाव आयोग इतना मजबूत हो कि सत्ताधारी पार्टी और विपक्ष, दोनों का उस पर भरोसा हो।

उन्होंने आरोप लगाया कि दो चुनाव आयुक्तों ने खुद मुख्य चुनाव आयुक्त के कामों को मनमाना और अनुचित बताया था और कहा कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों को हटाया जाना चाहिए। खरगे ने नैतिक आधार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की भी मांग की और आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने उनके दबाव में काम किया था।

कांग्रेस अध्यक्ष ने मौजूदा विवाद की तुलना नोटबंदी से की और वोटर लिस्ट से वोटरों के कथित तौर पर नाम हटाने को वोट की नोटबंदी करार दिया। उन्होंने कहा, "नोटबंदी के समय गरीब लोग लाइन में खड़े थे। वोट नोटबंदी में गरीबों को लाइन से ही बाहर कर दिया गया है।"

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