नई दिल्ली। दक्षिण एशियाई क्षेत्र में टकराव व सुरक्षा संबंधी मसले गरीबी घटाने की रफ्तार में बाधा बने हुए हैं। साथ ही, ये मानव विकास की प्रक्रिया में भी बाधक हैं। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने यह राय जताई है।

मनमोहन ने कहा कि उत्पादक संसाधनों तक पहुंच की असमानता के अलावा गवर्नेंस के लिए इस्तेमाल हो रहे सिस्टम में दक्षता की भारी कमी व विषमताएं दक्षिण एशिया में विकास की राह में रुकावट के साथ गरीबी घटाने की धीमी रफ्तार के लिए भी जिम्मेदार हैं।

साउथ एशियन यूनिवर्सिटी द्वारा आयोजित एक समारोह में अपने वक्तव्य में पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि इस क्षेत्र में टकराव व सुरक्षा संबंधी मसले विकास एजेंडा के समक्ष निरंतर चुनौती बने हुए हैं। एशियाई क्षेत्र को तबाह कर रहे इन आंतरिक व अंतरराष्ट्रीय टकरावों के संतोषजनक समाधान के बिना समावेशी विकास के लक्ष्य हासिल नहीं किए जा सकते।

उन्होंने कहा कि दक्षिण एशिया के कई देशों व पूरे क्षेत्र में भी तेज आर्थिक विकास दर्ज हुआ है, लेकिन इसके बावजूद अब भी यहां गरीबों, अशिक्षितों व कम शिक्षित लोगों की संख्या सबसे यादा है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की अर्थव्यवस्थाओं में सबसे यादा चर्चा अपर्याप्त क्षेत्रीय कारोबार, भौतिक जुड़ाव की कमी व भारी ऊर्जा संकट जैसे विकास की बाधा संबंधी मसलों की होती है।

हालांकि विकास को रफ्तार देने के लिए इन मसलों पर जोर देने की जरूरत है, लेकिन हमें इससे आगे भी बढ़ने की जरूरत है और यह जानने की जरूरत है कि पिछले वर्षों में जो तेज विकास हुआ वह गरीबी में तेजी से कमी में तब्दील क्यों नहीं हुआ।

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Posted By: Sachin k

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